Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Dec 2023 · 1 min read

“आभाष”

“आभाष”
कहते हैं
जोड़ियाँ ऊपर बना करती हैं,
लग रहा
घूस अब वहाँ भी चला करती है.

7 Likes · 3 Comments · 111 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Kishan tandon kranti
View all
You may also like:
हुस्न वालों से ना पूछो गुरूर कितना है ।
हुस्न वालों से ना पूछो गुरूर कितना है ।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
Hum to har chuke hai tumko
Hum to har chuke hai tumko
Sakshi Tripathi
वो अपना अंतिम मिलन..
वो अपना अंतिम मिलन..
Rashmi Sanjay
मातृभाषा
मातृभाषा
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
"अधूरी कविता"
Dr. Kishan tandon kranti
अपने
अपने
Shyam Sundar Subramanian
सारी जिंदगी कुछ लोगों
सारी जिंदगी कुछ लोगों
shabina. Naaz
कोई जब पथ भूल जाएं
कोई जब पथ भूल जाएं
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
3244.*पूर्णिका*
3244.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बरगद और बुजुर्ग
बरगद और बुजुर्ग
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
💐प्रेम कौतुक-542💐
💐प्रेम कौतुक-542💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
जनता के आगे बीन बजाना ठीक नहीं है
जनता के आगे बीन बजाना ठीक नहीं है
कवि दीपक बवेजा
वो मेरे बिन बताए सब सुन लेती
वो मेरे बिन बताए सब सुन लेती
Keshav kishor Kumar
भगवान बचाए ऐसे लोगों से। जो लूटते हैं रिश्तों के नाम पर।
भगवान बचाए ऐसे लोगों से। जो लूटते हैं रिश्तों के नाम पर।
*Author प्रणय प्रभात*
*हिंदी गजल के क्षेत्र में रघुवीर शरण दिवाकर राही का योगदान*
*हिंदी गजल के क्षेत्र में रघुवीर शरण दिवाकर राही का योगदान*
Ravi Prakash
चर्चित हो जाऊँ
चर्चित हो जाऊँ
संजय कुमार संजू
Three handfuls of rice
Three handfuls of rice
कार्तिक नितिन शर्मा
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
1-कैसे विष मज़हब का फैला, मानवता का ह्रास हुआ
1-कैसे विष मज़हब का फैला, मानवता का ह्रास हुआ
Ajay Kumar Vimal
वस्तु वस्तु का  विनिमय  होता  बातें उसी जमाने की।
वस्तु वस्तु का विनिमय होता बातें उसी जमाने की।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
नशे में फिजा इस कदर हो गई।
नशे में फिजा इस कदर हो गई।
लक्ष्मी सिंह
दूर हमसे वो जब से जाने लगे हैंं ।
दूर हमसे वो जब से जाने लगे हैंं ।
Anil chobisa
कोरी आँखों के ज़र्द एहसास, आकर्षण की धुरी बन जाते हैं।
कोरी आँखों के ज़र्द एहसास, आकर्षण की धुरी बन जाते हैं।
Manisha Manjari
हम तूफ़ानों से खेलेंगे, चट्टानों से टकराएँगे।
हम तूफ़ानों से खेलेंगे, चट्टानों से टकराएँगे।
आर.एस. 'प्रीतम'
दोस्त का प्यार जैसे माँ की ममता
दोस्त का प्यार जैसे माँ की ममता
प्रदीप कुमार गुप्ता
रिश्ते की नियत
रिश्ते की नियत
पूर्वार्थ
ज़िंदगी तेरे मिज़ाज का
ज़िंदगी तेरे मिज़ाज का
Dr fauzia Naseem shad
शुभ दिवाली
शुभ दिवाली
umesh mehra
उनकी आंखो मे बात अलग है
उनकी आंखो मे बात अलग है
Vansh Agarwal
Loading...