Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Nov 2023 · 1 min read

“आदि नाम”

“आदि नाम”
आदि नाम सतनाम है
सत ही है जग सार,
सतनाम के जपन से
मानव उतरे पार।
सतनाम सम नाम नहीं
सब नामों में सार,
सत के कारण सन्त जन
उतरे भव से पार।

6 Likes · 5 Comments · 190 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Kishan tandon kranti
View all
You may also like:
नारी
नारी
Bodhisatva kastooriya
आगे क्या !!!
आगे क्या !!!
Dr. Mahesh Kumawat
dr arun kumar shastri
dr arun kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
*कर्मफल सिद्धांत*
*कर्मफल सिद्धांत*
Shashi kala vyas
तुम तो ख़ामोशियां
तुम तो ख़ामोशियां
Dr fauzia Naseem shad
इश्क़ जब बेहिसाब होता है
इश्क़ जब बेहिसाब होता है
SHAMA PARVEEN
"तोल के बोल"
Dr. Kishan tandon kranti
■ मारे गए गुलफ़ाम क़सम से मारे गए गुलफ़ाम😊
■ मारे गए गुलफ़ाम क़सम से मारे गए गुलफ़ाम😊
*प्रणय प्रभात*
2383.पूर्णिका
2383.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कभी सोचा हमने !
कभी सोचा हमने !
Dr. Upasana Pandey
कितना प्यार
कितना प्यार
Swami Ganganiya
कत्ल खुलेआम
कत्ल खुलेआम
Diwakar Mahto
बापू गाँधी
बापू गाँधी
Kavita Chouhan
दोहा बिषय- दिशा
दोहा बिषय- दिशा
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
स्त्री चेतन
स्त्री चेतन
Astuti Kumari
है जो बात अच्छी, वो सब ने ही मानी
है जो बात अच्छी, वो सब ने ही मानी
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
जीवन में ईमानदारी, सहजता और सकारात्मक विचार कभीं मत छोड़िए य
जीवन में ईमानदारी, सहजता और सकारात्मक विचार कभीं मत छोड़िए य
Damodar Virmal | दामोदर विरमाल
वैमनस्य का अहसास
वैमनस्य का अहसास
Dr Parveen Thakur
सौंदर्य मां वसुधा की
सौंदर्य मां वसुधा की
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
*परिस्थिति चाहे जैसी हो, उन्हें स्वीकार होती है (मुक्तक)*
*परिस्थिति चाहे जैसी हो, उन्हें स्वीकार होती है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
उलझनें तेरे मैरे रिस्ते की हैं,
उलझनें तेरे मैरे रिस्ते की हैं,
Jayvind Singh Ngariya Ji Datia MP 475661
नारी तेरे रूप अनेक
नारी तेरे रूप अनेक
विजय कुमार अग्रवाल
मृत्यु पर विजय
मृत्यु पर विजय
Mukesh Kumar Sonkar
वो हर रोज़ आया करती है मंदिर में इबादत करने,
वो हर रोज़ आया करती है मंदिर में इबादत करने,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
मैंने खुद के अंदर कई बार झांका
मैंने खुद के अंदर कई बार झांका
ruby kumari
ग़ज़ल - फितरतों का ढेर
ग़ज़ल - फितरतों का ढेर
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
मां!क्या यह जीवन है?
मां!क्या यह जीवन है?
Mohan Pandey
मैं हूं कार
मैं हूं कार
Santosh kumar Miri
संग सबा के
संग सबा के
sushil sarna
Loading...