Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

आज की नारी

आज की नारी

घूँघट त्याग नज़र से नज़र मिलाने लगी है,
नारी शक्ति अपनी ताकत दिखाने लगी है !!

घुट-घुट के जीना बीते दिनों की बात हुई,
खुलकर जिंदगी का लुफ्त उठाने लगी है!!

छोड़ दिया है उसने चारदीवारी में कैद रहना,
देहरी के बहार भी अब कदम जमाने लगी है!!

सीख लिया है कतरे हुए परों से भी उड़ना
परचम आकाश में भी अब लहराने लगी है !!

कल तक रही जो बनकर नाज़ुक कली
आज खुशबू चारो और बिखराने लगी है !!

छोड़कर दकियानूसी रीती रिवाज़ो को
नई दुनिया में, कदम बढ़ाने लगी है !!

जल, थल, वायु, कुछ नहीं रहा अब अछूता
दर दिशा में ताकत अपनी आज़माने लगी है !!

अब डर नहीं लगता इन्हे मानुषी भेडियो से
बन सिहंनी, गर्जना से अपनी डराने लगी है!!

क्या हिमाकत किसी रावण की, उड़ा ले जाए
बहरूपियों को सबक खुद ही सिखाने लगी है !!

भूल जाए दुनियाँ अब चौसर के दाँव पे लगाना
अब धर चंडी का रूप आत्मरक्षा पाने लगी है !!

लक्ष्मी,विद्या,सरस्वती, संग नौ दुर्गा रूप लिए
वक़्त की नज़ाकत से कर्म अपना निभाने लगी है !!

है आज भी वही ममता, प्रेम और त्याग की मूरत
ये न समझना “धर्म” अपने से मुँह चुराने लगी है !!

स्वरचित: डी के निवातिया

1 Like · 2 Comments · 176 Views
You may also like:
पढ़ी लिखी लड़की
Swami Ganganiya
" हैप्पी और पैंथर "
Dr Meenu Poonia
आया सावन ओ साजन
Anamika Singh
एहसास पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
अश्रुपात्र A glass of years भाग 8
Dr. Meenakshi Sharma
कबीर के राम
Shekhar Chandra Mitra
दादी की कहानी
दुष्यन्त 'बाबा'
जीने का हुनर आता
Anamika Singh
हम सब एक है।
Anamika Singh
छंदों में मात्राओं का खेल
Subhash Singhai
पिता
Rajiv Vishal
किसी और के खुदा बन गए है।
Taj Mohammad
✍️मेरी शख़्सियत✍️
"अशांत" शेखर
कुएं का पानी की कहानी | Water In The Well...
harpreet.kaur19171
परदेश
DESH RAJ
सेमल के वृक्ष...!
मनोज कर्ण
अबके सावन लौट आओ
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मेरे पिता
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
✍️✍️भोंगे✍️✍️
"अशांत" शेखर
पुस्तक समीक्षा -एक थी महुआ
Rashmi Sanjay
पिता का आशीष
Prabhudayal Raniwal
तू हकीकत से रू बरू होगा।
Taj Mohammad
✍️कोई इंसान आया..✍️
"अशांत" शेखर
सुन्दर घर
Buddha Prakash
सरकारी नौकरी वाली स्नेहलता
Dr Meenu Poonia
शिक्षित बने ।
Buddha Prakash
“ मिलकर सबके साथ चलो “
DrLakshman Jha Parimal
मेरी प्रथम शायरी (2011)-
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
रूसवा है मुझसे जिंदगी
VINOD KUMAR CHAUHAN
समझा दिया है
Dr fauzia Naseem shad
Loading...