Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jan 2024 · 2 min read

आक्रोष

खून खौल उठता है मेरा, आँख से आंसू बहते है
एक बच्ची की स्मिता लुटी है, कैसे हम सब चुप बैठे है?

कायर है लोग आजके, जो कहने से भी कतराते हैं
सुनकर चीख वो माँ बहनो की, अनसुना कैसे कर जाते हैं?

बगल गली में कुत्ता भौंके, तो पत्थर खूब चलाते हैं
अगर पास कोई लड़की छेड़े, अनदेखा कर जाते हैं

आज का बेटा पूरी तरह से,अंदर-अंदर सड़ चूका है
तन स्वस्थ दिखता है उसका, मन से लेकिन मर चूका है

कर्म का कोई बोध नहीं है ,ना दुष्कर्म की ग्लानि है
लाज रिश्तों का बचा नहीं अब, ना आँखों में पानी है

“काम” का यह विष सबके, मन में है यूं पल रहा
वासना का आग सबके, तन में जैसे जल रहा

क्या वहशीपन पौरुष का ये , बच्चो का भी मान नहीं
लाज लूट ले नारी का जो , नर का है ये काम नहीं

जिस तन को है नोचा नर ने, उसने ही नर को जन्म दिया
खींच कर जिसको हवस बुझाई, उसी आँचल ने बड़ा किया

जिसकी लाज है लूटी तूने, किसी की वो दुनिया होगी
किसी की साथी, किसी का साया, किसी की वो बिटिया होगी

पाप किया है तूने भारी, कैसे बोझ उठाएगा?
अपने घर में माँ बहनों से, कैसे आँख मिलाएगा?

कभी क्या सोचा है तूने, एक दिन कहीं ऐसा हो जाए
तू घर पर नही हो, कोई, तेरी आन को लूट ले जाए

तब समझेगा दर्द को उसके, जो तुझसे लिपट कर रोएगी
होश ना होगा उम्र भर अब, बस अपने ग़म को ढोएगी

एक बार जो देव कोई, कर को मेरे खोल दे
दंड दे सकता हूँ मैं उनको, इतना सा बस बोल दे

भष्म कर दूँ पापी को मैं, दुष्टों को संहार करूँ
एक ही वार करु उनपर मैं, उनके प्राण निकाल लूँ

समय शेष है अब भी हे नर, जागो और सम्हल जाओ
करो सम्मान नारी का तुम, अपना जीवन सफल बना जाओ

103 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
तुमसे एक पुराना रिश्ता सा लगता है मेरा,
तुमसे एक पुराना रिश्ता सा लगता है मेरा,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
लाईक और कॉमेंट्स
लाईक और कॉमेंट्स
Dr. Pradeep Kumar Sharma
गुम सूम क्यूँ बैठी हैं जरा ये अधर अपने अलग कीजिए ,
गुम सूम क्यूँ बैठी हैं जरा ये अधर अपने अलग कीजिए ,
Sukoon
* खिल उठती चंपा *
* खिल उठती चंपा *
surenderpal vaidya
हम तो किरदार की
हम तो किरदार की
Dr fauzia Naseem shad
हर किसी का एक मुकाम होता है,
हर किसी का एक मुकाम होता है,
Buddha Prakash
आस लगाए बैठे हैं कि कब उम्मीद का दामन भर जाए, कहने को दुनिया
आस लगाए बैठे हैं कि कब उम्मीद का दामन भर जाए, कहने को दुनिया
Shashi kala vyas
बेरोजगारी मंहगायी की बातें सब दिन मैं ही  दुहराता हूँ,  फिरभ
बेरोजगारी मंहगायी की बातें सब दिन मैं ही दुहराता हूँ, फिरभ
DrLakshman Jha Parimal
Peace peace
Peace peace
Poonam Sharma
दोनों हाथों से दुआएं दीजिए
दोनों हाथों से दुआएं दीजिए
Harminder Kaur
एक उजली सी सांझ वो ढलती हुई
एक उजली सी सांझ वो ढलती हुई
नूरफातिमा खातून नूरी
योगी?
योगी?
Sanjay ' शून्य'
"लेखनी"
Dr. Kishan tandon kranti
मैं मगर अपनी जिंदगी को, ऐसे जीता रहा
मैं मगर अपनी जिंदगी को, ऐसे जीता रहा
gurudeenverma198
घर में यदि हम शेर बन के रहते हैं तो बीबी दुर्गा बनकर रहेगी औ
घर में यदि हम शेर बन के रहते हैं तो बीबी दुर्गा बनकर रहेगी औ
Ranjeet kumar patre
23/126.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/126.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हर एक मन्जर पे नजर रखते है..
हर एक मन्जर पे नजर रखते है..
कवि दीपक बवेजा
मुश्किल जब सताता संघर्ष बढ़ जाता है🌷🙏
मुश्किल जब सताता संघर्ष बढ़ जाता है🌷🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
"शहीद साथी"
Lohit Tamta
गौर किया जब तक
गौर किया जब तक
Koमल कुmari
मेरा जीवन,मेरी सांसे सारा तोहफा तेरे नाम। मौसम की रंगीन मिज़ाजी,पछुवा पुरवा तेरे नाम। ❤️
मेरा जीवन,मेरी सांसे सारा तोहफा तेरे नाम। मौसम की रंगीन मिज़ाजी,पछुवा पुरवा तेरे नाम। ❤️
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
मुक्तक... छंद मनमोहन
मुक्तक... छंद मनमोहन
डॉ.सीमा अग्रवाल
*तन्हाँ तन्हाँ  मन भटकता है*
*तन्हाँ तन्हाँ मन भटकता है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
*हमारे ठाठ मत पूछो, पराँठे घर में खाते हैं (मुक्तक)*
*हमारे ठाठ मत पूछो, पराँठे घर में खाते हैं (मुक्तक)*
Ravi Prakash
आसमां में चांद प्यारा देखिए।
आसमां में चांद प्यारा देखिए।
सत्य कुमार प्रेमी
प्यार जताना नहीं आता मुझे
प्यार जताना नहीं आता मुझे
MEENU
उम्र  बस यूँ ही गुज़र रही है
उम्र बस यूँ ही गुज़र रही है
Atul "Krishn"
शिव तेरा नाम
शिव तेरा नाम
Swami Ganganiya
असली परवाह
असली परवाह
*Author प्रणय प्रभात*
दुआएं
दुआएं
Santosh Shrivastava
Loading...