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6 Apr 2023 · 1 min read

आँखों पर ऐनक चढ़ा है, और बुद्धि कुंद है।

आँखों पर ऐनक चढ़ा है, और बुद्धि कुंद है।
बोध पर पर्दा पड़ा है द्वार सारे बंद है।
किस तरफ किसी ओर जाएँ, कौन सोचे क्यों भला~
लोभ के वश में हुए सब, ज्ञान की गति मन्द है।।

✍️ संजीव शुक्ल ‘सचिन’

1 Like · 515 Views
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