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12 Feb 2023 · 1 min read

“अहसास”

“अहसास”
न बारिश की बून्दों से धुलता
न समय की रचती धूल
न कोई राज्यादेश का मोहताज
न लागू होता कोई रूल
ये मस्तिष्क पटल पर अंकित रहता है
तारीफ़ न निन्दा सहता है
अहसास ही वो संजीवनी है
जो हर हाल में जिन्दा रहता है।
– डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति

5 Likes · 2 Comments · 302 Views
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