Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Sep 2023 · 1 min read

अमन तहज़ीब के परचम को हम ईमान कहते हैं।

अमन तहज़ीब के परचम को हम ईमान कहते हैं।
मौहब्बत जिनमें बस्ती है उसे इंसान कहते हैं।
यहां कुरआन और गीता को सब मिलके पढ़ते हैं।
इसी रब्बे इलाही को हम हिन्दुस्तान कहते हैं।। Phool gufran

1 Like · 239 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
उन दरख्तों पे कोई फूल न खिल पाएंगें
उन दरख्तों पे कोई फूल न खिल पाएंगें
Shweta Soni
"वे खेलते हैं आग से"
Dr. Kishan tandon kranti
क्या कहती है तस्वीर
क्या कहती है तस्वीर
Surinder blackpen
💐अज्ञात के प्रति-142💐
💐अज्ञात के प्रति-142💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
“जहां गलती ना हो, वहाँ झुको मत
“जहां गलती ना हो, वहाँ झुको मत
शेखर सिंह
*कभी नहीं पशुओं को मारो (बाल कविता)*
*कभी नहीं पशुओं को मारो (बाल कविता)*
Ravi Prakash
चाँद तारे गवाह है मेरे
चाँद तारे गवाह है मेरे
shabina. Naaz
*
*"तुलसी मैया"*
Shashi kala vyas
बहू-बेटी
बहू-बेटी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
अपना दिल
अपना दिल
Dr fauzia Naseem shad
समर्पण
समर्पण
Sanjay ' शून्य'
होकर मजबूर हमको यार
होकर मजबूर हमको यार
gurudeenverma198
Change is hard at first, messy in the middle, gorgeous at th
Change is hard at first, messy in the middle, gorgeous at th
पूर्वार्थ
"The Deity in Red"
Manisha Manjari
#प्रभात_चिन्तन
#प्रभात_चिन्तन
*Author प्रणय प्रभात*
समय के पहिए पर कुछ नए आयाम छोड़ते है,
समय के पहिए पर कुछ नए आयाम छोड़ते है,
manjula chauhan
कहीं भूल मुझसे न हो जो गई है।
कहीं भूल मुझसे न हो जो गई है।
surenderpal vaidya
अवधी मुक्तक
अवधी मुक्तक
प्रीतम श्रावस्तवी
दोहे
दोहे
अशोक कुमार ढोरिया
अंतहीन प्रश्न
अंतहीन प्रश्न
Shyam Sundar Subramanian
मुझको चाहिए एक वही
मुझको चाहिए एक वही
Keshav kishor Kumar
मन की आँखें खोल
मन की आँखें खोल
Kaushal Kumar Pandey आस
तेरा मेरा वो मिलन अब है कहानी की तरह।
तेरा मेरा वो मिलन अब है कहानी की तरह।
सत्य कुमार प्रेमी
आजा कान्हा मैं कब से पुकारूँ तुझे।
आजा कान्हा मैं कब से पुकारूँ तुझे।
Neelam Sharma
सुन लो बच्चों
सुन लो बच्चों
लक्ष्मी सिंह
सुप्त तरुण निज मातृभूमि को हीन बनाकर के विभेद दें।
सुप्त तरुण निज मातृभूमि को हीन बनाकर के विभेद दें।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
दूर तलक कोई नजर नहीं आया
दूर तलक कोई नजर नहीं आया
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
हमारी निशानी मिटा कर तुम नई कहानी बुन लेना,
हमारी निशानी मिटा कर तुम नई कहानी बुन लेना,
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
3008.*पूर्णिका*
3008.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ग़ज़ल:- तेरे सम्मान की ख़ातिर ग़ज़ल कहना पड़ेगी अब...
ग़ज़ल:- तेरे सम्मान की ख़ातिर ग़ज़ल कहना पड़ेगी अब...
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
Loading...