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12 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-95💐

अब और कोई तमाशा रह गया है बाकी,
हर बार की नाराज़गी अच्छी नहीं लगती।।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
143 Views
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