Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jun 2018 · 2 min read

“विधान ऐसा बने”

कवित्त छंद की परिभाषा और उदाहरण
कवित्त छंद
—————यह एक वर्णिक छंद है।इसमें कोई गण का नियम नहीं होता है।इसके प्रत्येक चरण में इकतीस से तैतीस वर्ण या अक्षर होते हैं।कवित्त छंद कई तरह के होते हैं।जिनमें मनहरण,देवघनाक्षरी,रूप घनाक्षरी आदि प्रसिद्ध हैं।
इसमें चार चरण होते हैं।प्रत्येक चरण में यति आठ-आठ-आठ-सात अक्षरों पर होती है।सभी चरणों में तुकान्तता अनिवार्य है।यह छंद मधुर भावों की अभिव्यक्ति की बजाय ओजभावों के लिए अधिक उपयुक्त है।इसका पाठ घनगर्जन सम होना चाहिए।
मनहरण कवित्त छंद
“विधान ऐसा बने”
————————-

बलात्कारियों को सज़ा,तुरन्त ही दीजिएगा,
अपराध मिट जाएँ,विधान ऐसा बने।

सबक ऐसा मिले,देखके कलेजा हिले,
रुह भी काँप उठे रे,विधान ऐसा बने।

अपराध करें छूटें,भाग शोषित के फूटें,
अब खिलवाड़ नहीं,विधान ऐसा बने।

सरेआम फाँसी मिले,छूट ना ज़रा सी मिले,
बंद होंगे अपराध,विधान ऐसा बने।

2-
उजड़े ना घर कोई,जगे मानवता सोई,
मान सबका हो यहाँ,विधान ऐसा बने।

प्रतिकूल काम न हो,अन्याय का नाम न हो,
दुष्कर्म कुकर्म मिटें,विधान ऐसा बने।

बुराइयाँ हट जाएँ,अच्छाइयाँ सट जाएँ,
सब अपने से लगें,विधान ऐसा बने।

निर्भया निर्भय रहे,सारे जब सभ्य रहें,
दुनिया स्वर्ग हो जाए,विधान ऐसा बने।

3-
छोटे बच्चों को रौंदना,छी:शर्मनाक बड़ा है,
ये कुकृत्य मिट जाएँ,विधान ऐसा बने।

दोहरी नीतियाँ छोड़ें,घर जोड़े नहीं तोड़ें,
एक होके रहें यहाँ,विधान ऐसा बने।

व्यावहार एक रहे,सबका विकास हो,
भेद सारे मिट जाएँ,विधान ऐसा बने।

हँसके रहें मानव,जैसे कमल पानी में,
सपना साकार लगे,विधान ऐसा बने।

4-
सत्य प्रेम शक्ति रहें,धर्म उसी को हैं कहें,
सभी अपना के चलें,विधान ऐसा बने।

अन्याय सहना नहीं,ये भी अन्याय सुनिए,
न्याय समय से मिले,विधान ऐसा बने।

पदाधिकारी सही हो,हक जिसका वही हो,
सब काम ठीक होंगे,विधान ऐसा बने।

स्वतंत्र विचार रहें,सबके अधिकार रहें,
छिने नहीं अधिकार,विधान ऐसा बने।

?आर.एस.प्रीतम?

594 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from आर.एस. 'प्रीतम'
View all
You may also like:
** लोभी क्रोधी ढोंगी मानव खोखा है**
** लोभी क्रोधी ढोंगी मानव खोखा है**
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
ऊँचाई .....
ऊँचाई .....
sushil sarna
सच का सच
सच का सच
डॉ० रोहित कौशिक
*** आशा ही वो जहाज है....!!! ***
*** आशा ही वो जहाज है....!!! ***
VEDANTA PATEL
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Mukesh Kumar Sonkar
*छतरी (बाल कविता)*
*छतरी (बाल कविता)*
Ravi Prakash
आज फिर दर्द के किस्से
आज फिर दर्द के किस्से
Shailendra Aseem
बस जाओ मेरे मन में
बस जाओ मेरे मन में
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
ड्यूटी और संतुष्टि
ड्यूटी और संतुष्टि
Dr. Pradeep Kumar Sharma
श्रेष्ठ बंधन
श्रेष्ठ बंधन
Dr. Mulla Adam Ali
बेवफा, जुल्मी💔 पापा की परी, अगर तेरे किए वादे सच्चे होते....
बेवफा, जुल्मी💔 पापा की परी, अगर तेरे किए वादे सच्चे होते....
SPK Sachin Lodhi
■ इस बार 59 दिन का सावन
■ इस बार 59 दिन का सावन
*प्रणय प्रभात*
साथ अगर उनका होता
साथ अगर उनका होता
gurudeenverma198
वो आपको हमेशा अंधेरे में रखता है।
वो आपको हमेशा अंधेरे में रखता है।
Rj Anand Prajapati
জপ জপ কালী নাম জপ জপ দুর্গা নাম
জপ জপ কালী নাম জপ জপ দুর্গা নাম
Arghyadeep Chakraborty
फूलों सी मुस्कुराती हुई शान हो आपकी।
फूलों सी मुस्कुराती हुई शान हो आपकी।
Phool gufran
श्यामपट
श्यामपट
Dr. Kishan tandon kranti
शुभ संकेत जग ज़हान भारती🙏
शुभ संकेत जग ज़हान भारती🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
एक पीर उठी थी मन में, फिर भी मैं चीख ना पाया ।
एक पीर उठी थी मन में, फिर भी मैं चीख ना पाया ।
आचार्य वृन्दान्त
जिन्दगी
जिन्दगी
लक्ष्मी सिंह
We all have our own unique paths,
We all have our own unique paths,
पूर्वार्थ
हे पैमाना पुराना
हे पैमाना पुराना
Swami Ganganiya
ਪਰਦੇਸ
ਪਰਦੇਸ
Surinder blackpen
मैं सोचता हूँ कि आखिर कौन हूँ मैं
मैं सोचता हूँ कि आखिर कौन हूँ मैं
VINOD CHAUHAN
राधा की भक्ति
राधा की भक्ति
Dr. Upasana Pandey
3309.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3309.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
तेरी मुहब्बत से, अपना अन्तर्मन रच दूं।
तेरी मुहब्बत से, अपना अन्तर्मन रच दूं।
Anand Kumar
जिस चीज में दिल ना लगे,
जिस चीज में दिल ना लगे,
Sunil Maheshwari
शेखर सिंह ✍️
शेखर सिंह ✍️
शेखर सिंह
मेरी देह बीमार मानस का गेह है / मुसाफ़िर बैठा
मेरी देह बीमार मानस का गेह है / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
Loading...