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28 Aug 2023 · 1 min read

अन्धी दौड़

इस अन्धी दौड़ के सर्कल में ख़ुद को मत फंसाएं अब
सुकूनत है अगर मंज़िल तो थोड़ा ठहर जाएं अब

पकड़ कर आईना हाथों में अक्सर फ़िक्र में दिखना
मेरी मानें तो इतना बोझ सर पर मत उठाएं अब

अंधेरा देखना है तो जलाएं शम्अ ख़ुश होकर
अगर है रोशनी पानी तो फिर ख़ुद को जलाएं अब

सभी बहती हुई नदियों की मुश्किल एक जैसी है
जिन्हें है तैरना आता उन्हें कैसे बचाएं अब

अगर सुख चैन पाना है तो रस्ता फिर यही है एक
अभी तक जो हुआ है वो सभी कुछ भूल जाएं अब

— शिवकुमार बिलगरामी

Language: Hindi
1 Like · 146 Views
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