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8 Feb 2024 · 1 min read

” अधरों पर मधु बोल “

गीत

पुलक गात पर अरुणिम लाली ,
अधरों पर मधु बोल !
हँसी बिखेरे , आँगन में तू ,
हिंरणी सी मत डोल !!

नज़रें टिकी हुई हैं हम पर ,
दुनिया भर की ऐसी !
आँखों का काजल कह देगा ,
तेरी सब मदहोशी !
खुद को ज़रा बांध कर रख ले ,
बंध न सारे खोल !!

अभी सपन बाँधें हैं हमने ,
रंग नये भरना है !
समय सदा करता है कलकल ,
लहरों से डरना है !
खुशियाँ यहाँ ठहरती कम है ,
मिली सभी अनमोल !!

यहाँ गमकती पुरवाई है ,
और चमकती रातें !
दिन चुटकी में ऐसे बीतें ,
समझ नहीं कुछ पाते !
जो भी हासिल हो पाया है ,
करती रह तू तौल !!

साज , सिंगार , बांकपन तेरा ,
खूब कहर ढाता है !
बंजारिन आशाऐं हँसती ,
मन तब घबराता है !
जो भी पाया , वह बटोर लें ,
यहाँ खूब हैं झोल !!

रचियता :
बृज व्यास
शाजापुर ( मध्यप्रदेश )

Language: Hindi
2 Likes · 136 Views
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