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17 Feb 2024 · 1 min read

अदाकारी

अदाकारी सीखकर
अदाकार बन गए
कलम के सिपाही
फनकार बन गए

लहराती ज़ुल्फों में
अब उड़ती है ग़ज़ल
गीतों के कमरों में
रोशनदान हो गए

मानते थे पहले जो
लिखना कमाल था
बाजार में सब हुजूर
औजार आ गए।।।

प्रस्तुति की ये अदाएं
क्या जनाब सुनिए
बादलों के झुंड की
आप चाल देखिए।।

लिखते रहो आप भी
नितांत सुख आपका
तालियां तो इधर हैं
क्या तुम्हारा वास्ता।।

सूर्यकांत द्विवेदी

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