Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Feb 2023 · 2 min read

अति आत्मविश्वास

अति आत्मिश्वास –

ठाकुर शिखर सिंह इलाके के बहुत बड़े जमींदार थे खेती बारी रुतबा रसूख बहुत था। ठाकुर साहब की तीन बेटियां थी एव तीन ही बेटे थे ।ठाकुर साहब ने गांव में कहे या जवार में पहला ट्यूबवेल लगवाया जिसके कारण गांव में बिजली आयी ।ठाकुर साहब ने अपनी दूसरी बेटी आभा का विवाह तय किया और बड़े धूम धाम से विवाहोत्सव आयोजित करने का फैसला किया।
चूंकि गांव में बिजली आ चुकी थी अतः उन्होंने बिजली के झलरों से घर की जबजस्त सजावट कराई।

बिजली का कनेक्शन ठाकुर साहब के ट्यूबवेल से घर के लिए देने की बात आई तब ठाकुर साहब ने बिजली बिभाग के कर्मचारी दयाल को बुलाया। दयाल वैसे तो बिजली के कार्य मे बहुत दक्ष था लेकिन वह आत्म विश्वास से अतिरेक भी था ।
दयाल बिजली का कनेक्सकन देने के लिए दांत में बिजली का तार दबाए था तार का एक सिरा नीचे लटक रहा था वह बिजली के खम्भे पर ऐसे चढ़ गया जैसे बंदर झट से कही भी चढ़ जाते है। लेकिन दयाल जल्दी बाजी में दांत में दबाए तार के दूसरे सिरे से विल्कुल लापरवाह बेखौफ था दयाल ज्यो ही बिजली के खम्भे पर चढ़ा दांत में पकड़े तार का दूसरा सिरा पोल के नीचे के तार से चिपक गया जिसके कारण उसके शरीर में चार सौ चालीस
बोल्ट का करेंट दौड़ गया वह बिजली के पोल से ऐसे टपका जैसे किसी पेड़ से कोई सुखी पुरानी डाली टूट कर गिरती है।

चारो तरफ हाहाकार मच गया विवाह के शुभ वातावरण में मायूसी उदासी मातम का वातावरण छा गया।
पुलिस आयी लेकिन ठाकुर साहब का रुतबा रसूख इतना बड़ा था कि वह कुछ भी नही कर पाई आभा का विवाह तो सम्पन्न हुआ किंतु गांव के इतिहास में खौफनाक अध्याय जोड़ने के बाद।।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।

Language: Hindi
131 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
View all
You may also like:
मेरी एक सहेली है
मेरी एक सहेली है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
राम आएंगे
राम आएंगे
Neeraj Agarwal
ज़िंदगी के फ़लसफ़े
ज़िंदगी के फ़लसफ़े
Shyam Sundar Subramanian
परफेक्ट बनने के लिए सबसे पहले खुद में झांकना पड़ता है, स्वयं
परफेक्ट बनने के लिए सबसे पहले खुद में झांकना पड़ता है, स्वयं
Seema gupta,Alwar
नहीं मिलते सभी सुख हैं किसी को भी ज़माने में
नहीं मिलते सभी सुख हैं किसी को भी ज़माने में
आर.एस. 'प्रीतम'
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
इत्र, चित्र, मित्र और चरित्र
इत्र, चित्र, मित्र और चरित्र
Neelam Sharma
* मधुमास *
* मधुमास *
surenderpal vaidya
थोड़ी दुश्वारियां ही भली, या रब मेरे,
थोड़ी दुश्वारियां ही भली, या रब मेरे,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
इस जमाने जंग को,
इस जमाने जंग को,
Dr. Man Mohan Krishna
जिसने हर दर्द में मुस्कुराना सीख लिया उस ने जिंदगी को जीना स
जिसने हर दर्द में मुस्कुराना सीख लिया उस ने जिंदगी को जीना स
Swati
आहट
आहट
Er. Sanjay Shrivastava
समय
समय
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कदम रोक लो, लड़खड़ाने लगे यदि।
कदम रोक लो, लड़खड़ाने लगे यदि।
Sanjay ' शून्य'
कहने को तो इस जहां में अपने सब हैं ,
कहने को तो इस जहां में अपने सब हैं ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
वैसे जीवन के अगले पल की कोई गारन्टी नही है
वैसे जीवन के अगले पल की कोई गारन्टी नही है
शेखर सिंह
हम मिले थे जब, वो एक हसीन शाम थी
हम मिले थे जब, वो एक हसीन शाम थी
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
लक्ष्य एक होता है,
लक्ष्य एक होता है,
नेताम आर सी
मेरे पास खिलौने के लिए पैसा नहीं है मैं वक्त देता हूं अपने ब
मेरे पास खिलौने के लिए पैसा नहीं है मैं वक्त देता हूं अपने ब
Ranjeet kumar patre
मन भर बोझ हो मन पर
मन भर बोझ हो मन पर
Atul "Krishn"
सर्दी का उल्लास
सर्दी का उल्लास
Harish Chandra Pande
23/215. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/215. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
अपनी काविश से जो मंजिल को पाने लगते हैं वो खारज़ार ही गुलशन बनाने लगते हैं। ❤️ जिन्हे भी फिक्र नहीं है अवामी मसले की। शोर संसद में वही तो मचाने लगते हैं।
अपनी काविश से जो मंजिल को पाने लगते हैं वो खारज़ार ही गुलशन बनाने लगते हैं। ❤️ जिन्हे भी फिक्र नहीं है अवामी मसले की। शोर संसद में वही तो मचाने लगते हैं।
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
हिन्दू जागरण गीत
हिन्दू जागरण गीत
मनोज कर्ण
स्वाल तुम्हारे-जवाब हमारे
स्वाल तुम्हारे-जवाब हमारे
Ravi Ghayal
कुंडलिया
कुंडलिया
sushil sarna
अब न तुमसे बात होगी...
अब न तुमसे बात होगी...
डॉ.सीमा अग्रवाल
"निर्णय आपका"
Dr. Kishan tandon kranti
*तलवार है तुम्हारे हाथ में हे देवी माता (घनाक्षरी: सिंह विलो
*तलवार है तुम्हारे हाथ में हे देवी माता (घनाक्षरी: सिंह विलो
Ravi Prakash
★ बचपन और बारिश...
★ बचपन और बारिश...
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...