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28 Dec 2023 · 1 min read

*अकड़ू-बकड़ू थे दो डाकू (बाल कविता )*

अकड़ू-बकड़ू थे दो डाकू (बाल कविता )
___________________
अकड़ू-बकड़ू थे दो डाकू
सदा जेब में रखते चाकू
जो भी मिलता उसे लूटते
हड्डी-पसली खूब कूटते
पुलिस पकड़ कर थाने लाई
जज साहब ने सजा सुनाई
——————————
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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