Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Oct 2022 · 1 min read

अंजाम ए जिंदगी

जाने क्यों और कैसे खुदा ,
मुझे यह कैसे शहर में ले आया।
जहां आते ही हमारी खुशियों ,
का जहान उजड़ गया ।
दिल का चैन खत्म,
और सुकून सब गायब हो गया।
हमारी ख्वाइशों के पौधे का ,
तिनका तिनका बिखर गया ।
सपनों के घरौंदे टूट गए ,
आशाओं का आइना धुंधला हो गया ।
एक आजाद पंछी के पर काट दिए गए ,
बस ! अब कुछ न पूछो !
इस बेरहम और बेवफा तकदीर के कारण ,
सारी जिंदगी का सत्यानाश हो गया ।
अपने देश के हमने सारे शहर देखे ,
कुछ में निवास भी किया ।मगर ,
कोई तो इतना मनहूस न हुआ ।
है तो बाबा फरीद के नाम पर ,
मगर इससे क्या फर्क पड़ता है !
आंखों का अंधा ही तो हमारे लिए ,
नाम नयन सुख हुआ ।
अब और क्या कहें इसके बारे में,
यूं समझ लो यहां आकर हमने तो ,
दोस्तों जीतेजी नर्क को देख लिया ।
अपराधी लोग तो मरकर नर्क भुगतते है ,
हम जैसे बेकसूर और मासूम इंसा ने ,
जाने किस अनजानी खता की वजह से ,
जीतेजी नर्क भुगत लिया ।
और अब भी भुगत रहे हैं।
बस जिंदगी को यूं ही गुजरते हुए ,
चाक दामन सी रहे है। ।
यूं अंजाम ए दास्तान हमारी जिंदगी का हुआ ।

Language: Hindi
2 Likes · 487 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from ओनिका सेतिया 'अनु '
View all
You may also like:
विनम्रता
विनम्रता
Bodhisatva kastooriya
नज़रिया
नज़रिया
Dr. Kishan tandon kranti
किस क़दर
किस क़दर
हिमांशु Kulshrestha
*दृष्टि में बस गई, कैकई-मंथरा (हिंदी गजल)*
*दृष्टि में बस गई, कैकई-मंथरा (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
चलो♥️
चलो♥️
Srishty Bansal
शीर्षक तेरी रुप
शीर्षक तेरी रुप
Neeraj Agarwal
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
हमारी तुम्हारी मुलाकात
हमारी तुम्हारी मुलाकात
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
Wakt ke girewan ko khich kar
Wakt ke girewan ko khich kar
Sakshi Tripathi
तुम मोहब्बत में
तुम मोहब्बत में
Dr fauzia Naseem shad
शूद्र व्यवस्था, वैदिक धर्म की
शूद्र व्यवस्था, वैदिक धर्म की
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
*जिंदगी के  हाथो वफ़ा मजबूर हुई*
*जिंदगी के हाथो वफ़ा मजबूर हुई*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
नमस्कार मित्रो !
नमस्कार मित्रो !
Mahesh Jain 'Jyoti'
अपनी टोली
अपनी टोली
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मुहब्बत
मुहब्बत
अखिलेश 'अखिल'
लिखना है मुझे वह सब कुछ
लिखना है मुझे वह सब कुछ
पूनम कुमारी (आगाज ए दिल)
शुभ दीपावली
शुभ दीपावली
Harsh Malviya
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
अमृत महोत्सव आजादी का
अमृत महोत्सव आजादी का
लक्ष्मी सिंह
शातिरपने की गुत्थियां
शातिरपने की गुत्थियां
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
यदि कोई आपके मैसेज को सीन करके उसका प्रत्युत्तर न दे तो आपको
यदि कोई आपके मैसेज को सीन करके उसका प्रत्युत्तर न दे तो आपको
Rj Anand Prajapati
जनाब बस इसी बात का तो गम है कि वक्त बहुत कम है
जनाब बस इसी बात का तो गम है कि वक्त बहुत कम है
Paras Mishra
बेचारा जमीर ( रूह की मौत )
बेचारा जमीर ( रूह की मौत )
ओनिका सेतिया 'अनु '
"एक ख्वाब टुटा था"
Lohit Tamta
उलझते रिश्तो को सुलझाना मुश्किल हो गया है
उलझते रिश्तो को सुलझाना मुश्किल हो गया है
Harminder Kaur
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Phool gufran
खुल जाये यदि भेद तो,
खुल जाये यदि भेद तो,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मैं क्या लिखूँ
मैं क्या लिखूँ
Aman Sinha
कहना नहीं तुम यह बात कल
कहना नहीं तुम यह बात कल
gurudeenverma198
डॉ. जसवंतसिंह जनमेजय का प्रतिक्रिया पत्र लेखन कार्य अभूतपूर्व है
डॉ. जसवंतसिंह जनमेजय का प्रतिक्रिया पत्र लेखन कार्य अभूतपूर्व है
आर एस आघात
Loading...