Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Nov 2023 · 1 min read

अंगदान

अंगदान

“सॉरी, हम पेशेंट को नहीं बचा पाएँगे। बस, कुछ ही समय बचा है। वह ब्रेनडेड हो चुका है।”
ऐसा कहकर मानो डॉक्टर ने सुनने वालों के कान में उबलता हुआ लावा उड़ेल दिया हो। मरीज के परिजन रोने-बिलखने लगे। किसी तरह खुद को सामान्य करने की कोशिश करते हुए मरीज के पिताजी ने पूछा, “डॉक्टर साहब, ब्रेनडेड वाले पेशेंट के बॉडी आर्गन तो डोनेट किए जा सकते हैं न ?”
“जी हाँ। कर सकते हैं। पर उसके लिए आपको एक फॉर्म भरकर सहमति देनी होगी।” डॉक्टर ने जवाब दिया।
“ठीक है सर। लाइए फॉर्म दीजिए। मैं अपनी सहमति देता हूँ। मेरा बेटा तो अब रहा नहीं, उसे जलाकर खाक करने से बेहतर है कि कम से कम उसके कुछ बॉडी आर्गन तो रहें। इस बहाने कुछ जरुरतमंदों की सहायता भी हो जाएगी और हमें तसल्ली रहेगी कि हमारे बेटे का कुछ अंश तो है हमारे आसपास। सर, हमारे बेटे की हार्ट, लीवर, किडनियाँ, आँखें, स्कीन और जो भी आर्गन डोनेट हो सकते हैं, कर दीजिए।” कलेजे पर पत्थर रखकर पिताजी ने कहा।
“काश ! अन्य लोग भी आपकी तरह सोच रखते, तो लाखों लोगों की जिंदगी में खुशियाँ बिखेर जाती।” डॉक्टर ने श्रद्धावनत होकर कहा और अपने सहयोगी कर्मचारी को अंगदान की औपचारिकता पूरी करने के लिए निर्देशित किया।
– डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़

213 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
*गर्मी की छुट्टियॉं (बाल कविता)*
*गर्मी की छुट्टियॉं (बाल कविता)*
Ravi Prakash
तूझे क़ैद कर रखूं मेरा ऐसा चाहत नहीं है
तूझे क़ैद कर रखूं मेरा ऐसा चाहत नहीं है
Keshav kishor Kumar
2433.पूर्णिका
2433.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
4-मेरे माँ बाप बढ़ के हैं भगवान से
4-मेरे माँ बाप बढ़ के हैं भगवान से
Ajay Kumar Vimal
परोपकार
परोपकार
Raju Gajbhiye
हर तरफ़ रंज है, आलाम है, तन्हाई है
हर तरफ़ रंज है, आलाम है, तन्हाई है
अरशद रसूल बदायूंनी
सेर
सेर
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
एक मशाल तो जलाओ यारों
एक मशाल तो जलाओ यारों
नेताम आर सी
आसां  है  चाहना  पाना मुमकिन नहीं !
आसां है चाहना पाना मुमकिन नहीं !
Sushmita Singh
तज द्वेष
तज द्वेष
Neelam Sharma
डा. तेज सिंह : हिंदी दलित साहित्यालोचना के एक प्रमुख स्तंभ का स्मरण / MUSAFIR BAITHA
डा. तेज सिंह : हिंदी दलित साहित्यालोचना के एक प्रमुख स्तंभ का स्मरण / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
"दुआ"
Dr. Kishan tandon kranti
उलझनें
उलझनें
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
पुष्पवाण साधे कभी, साधे कभी गुलेल।
पुष्पवाण साधे कभी, साधे कभी गुलेल।
डॉ.सीमा अग्रवाल
प्रकृति पर कविता
प्रकृति पर कविता
कवि अनिल कुमार पँचोली
विचार, संस्कार और रस-4
विचार, संस्कार और रस-4
कवि रमेशराज
वो कड़वी हक़ीक़त
वो कड़वी हक़ीक़त
पूर्वार्थ
झूठा फिरते बहुत हैं,बिन ढूंढे मिल जाय।
झूठा फिरते बहुत हैं,बिन ढूंढे मिल जाय।
Vijay kumar Pandey
सारथी
सारथी
लक्ष्मी सिंह
दो शब्द सही
दो शब्द सही
Dr fauzia Naseem shad
वो सुन के इस लिए मुझको जवाब देता नहीं
वो सुन के इस लिए मुझको जवाब देता नहीं
Aadarsh Dubey
🙅दस्तूर दुनिया का🙅
🙅दस्तूर दुनिया का🙅
*Author प्रणय प्रभात*
याद में
याद में
sushil sarna
जीवन के बसंत
जीवन के बसंत
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
सुख दुःख
सुख दुःख
जगदीश लववंशी
दादी की वह बोरसी
दादी की वह बोरसी
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
फूक मार कर आग जलाते है,
फूक मार कर आग जलाते है,
Buddha Prakash
हुनर
हुनर
अखिलेश 'अखिल'
शिक्षा का महत्व
शिक्षा का महत्व
Dinesh Kumar Gangwar
Loading...