Kokila Agarwal

रचनाकार- Kokila Agarwal

विधा- गज़ल/गीतिका

२१२२–२१२२–२१२२
ई है
कोशिशे नाकाम तो हरदम रही है
चल रहे हैं फिर भी यारो ज़िंदगी है

ज़िंदगी की फ़लसफे बिंदास हैं
दुख रहे या हो खुशी देखी नमी है

तुम नहीं पर सुन रही हैं आहटे सी
धड़कनो की कैसी ये दीवानगी है

चाहतो के दौर का मंज़र न पूछो
हर तरफ़ बस तू ही तू पर तू नहीं है

सोचते रहते हो क्या कुछ तो बताओ
ऐसी भी तो क्या हमारे में कमी है

चलते चलते रात भी चुप हो गई थी
सुन रहे जो पांव की पायल बजी है

दौर इक पीछे चले जब छोड़कर हम
ख्वाब आगे हैं अजब दीवानगी है

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Kokila Agarwal
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