वातावरण
मैं आज शांत महसूस कर रहा हूं,
क्या वास्तव में मै शांत हूं? या प्रभाव मात्र परिवेश का ?
वातावरण ही सही पर, अंततः तुम मुझे शांत कर देते हो ,
प्रतिदिन तुम मुझे खींचते हो, या मेरी आंतरिक बेचैनी तुम्हें,
खिंचाव किधर से भी हो, परिणाम कि मैं तुम्हारे साथ होता हूं।
तुम्हारे साथ मेरा होना, परिणाम कि मैं ख़ुद के साथ होता हूं।
वातावरण तुममें ऐसा क्या है? जो मुझे मेरे तक ले आता हैं।
तुम साधारण पेड़, पौधे, फूल, स्थान, वायु, मात्र ही तो हो।
क्या तुम यहीं मात्र हो? या हम दोनों की एकता का संकेत हो।
तुम साधारण तो नहीं हो, अगर साधारण होते तो यू प्रेम न करते।
मैं अनुभाव (अनुभव)करता हूं, कि तुम मेरे हो,
क्या तुम भी ? शायद हा,
मेरी अनुभूति कहती है, मैं तुमसे पृथक नहीं हूँ ,
शांति संकेत है, कि मैं तुम और तुम मैं हूँ ,
मैं तुम्हारी गोद में सोना चाहता हूँ ।
मैं तुम्हारी अनंत शांति में खोना चाहता हूँ।
समय कुछ याद दिला रहा है, मै फिर उसका हो जाऊंगा ।
मैं वादा करता हूँ ,मै फिर मिलने आऊंगा।
और एक दिन हमेशा के लिए मैं तुम्हारा हो जाऊंगा।
तुम्हारा हो जाऊंगा ,तुम्हारा हो जाऊंगा।
~ यथार्थ