मुक्तक

मुक्तक
——-
हमारी सोच के आधार का विस्तार कितना है,
हमारी कल्पना उतनी ज्ञान का कोष जितना है।
राज के कूप जल भण्डार में जो मण्डूक रहता है,
उसे लगता है कि दुनियां का बस आकर इतना है।।
~राजकुमार पाल (राज)✍🏻
मुक्तक
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हमारी सोच के आधार का विस्तार कितना है,
हमारी कल्पना उतनी ज्ञान का कोष जितना है।
राज के कूप जल भण्डार में जो मण्डूक रहता है,
उसे लगता है कि दुनियां का बस आकर इतना है।।
~राजकुमार पाल (राज)✍🏻