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16 Dec 2024 · 1 min read

दोहा पंचक. . . . लेखक

दोहा पंचक. . . . लेखक

लेखक भावों का करे, नव रस से शृंगार ।
शब्द- शब्द में कल्पना, को करता साकार ।।

लेखक लिखता आज के, जीवन का साहित्य ।
अन्धकार जो चीर दे ,ऐसा वो आदित्य ।।

लेखक लड़ता झूठ से, निर्भय होकर जंग ।
करे सदा साकार वह, अमर सत्य के रंग ।।

कहीं विरह की वेदना, कहीं मदन शृंगार ।
लेखक शब्दों से करे, तीक्ष्ण भाव की धार ।।

संस्कारों का हो हनन , या नारी की बात ।
करे उजागर शब्द से, लेखक हर आघात ।।

सुशील सरना / 16-12-24

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