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12 Jan 2024 · 1 min read

My Guardian Angel

Beneath the moon’s gentle gaze by the seashore,
I wept in silence, my soul heavy, my heart sore.
Cursing the struggles that clung to my life,
A bitter echo of grief, cutting like a knife.
The waves whispered a poignant birthday song,
Echoing the day when my parents were gone.
Should I joyfully bloom for another year’s embrace,
Or mourn for the loneliness etched on my face?
The sun lingered too long, and I lit the birthday candles,
Aching grief rose inside me, and it was too heavy to handle.
I closed my tear-filled eyes and took a deep breath,
Wishing for a reunion, in solitude, I prayed.
A celestial ear caught whispers in the night,
A benevolent deity, a guardian in light.
A soft-hearted God gazed at me with his sparkling eyes,
Becoming my guardian angel as time drifted by.

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