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21 Feb 2017 · 1 min read

II दिमागों में गुरूर देखा है….. II

दिमागों में गुरूर देखा है l
सलीके में शुरूर देखा है ll

भरी दौलत से जेबे हैं जिनकी l
उधारी में हुजूर देखा है ll

देखी कारों में भी बुझी शक्ले l
फकीरों में भी नूर देखा है ll

मिले हर दम बनावटी चीजें l
बाजारू ये फितूर देखा है ll

न रखना हसरते ‘सलिल’ उनसे l
तेरा सारा कुसूर देखा है ll

संजय सिंह ‘सलिल’
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश l

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