Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jun 2024 · 1 min read

3536.💐 *पूर्णिका* 💐

3536.💐 पूर्णिका 💐
🌹 कहते हो एतबार है हमसे🌹
22 2212 1222
कहते हो एतबार है हमसे।
तेरा कैसा ये प्यार है हमसे।।
हमने दिल खोल दे दिया सबकुछ।
कह जान कहाँ निसार है हमसे।।
जो भी चाहत रखे यहाँ पूरी ।
यूं नेक कहाँ विचार है हमसे।।
मतलबपरस्ती मिले सभी देखो।
कहते आया सुधार है हमसे।।
खुशियांँ रखते कदम जहाँ खेदू ।
साथी साथ दमदार है हमसे।।
……..✍ डॉ .खेदू भारती “सत्येश “
11-06-2024मंगलवार

16 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
शहर में बिखरी है सनसनी सी ,
शहर में बिखरी है सनसनी सी ,
Manju sagar
हारता वो है
हारता वो है
नेताम आर सी
मां रिश्तों में सबसे जुदा सी होती है।
मां रिश्तों में सबसे जुदा सी होती है।
Taj Mohammad
ऋण चुकाना है बलिदानों का
ऋण चुकाना है बलिदानों का
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
ग़ज़ल
ग़ज़ल
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
44...Ramal musamman maKHbuun mahzuuf maqtuu.a
44...Ramal musamman maKHbuun mahzuuf maqtuu.a
sushil yadav
कुदरत है बड़ी कारसाज
कुदरत है बड़ी कारसाज
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*मर्यादा*
*मर्यादा*
Harminder Kaur
रमेशराज के हास्य बालगीत
रमेशराज के हास्य बालगीत
कवि रमेशराज
छोटी सी दुनिया
छोटी सी दुनिया
shabina. Naaz
ज़िंदगी की
ज़िंदगी की
Dr fauzia Naseem shad
याद आए दिन बचपन के
याद आए दिन बचपन के
Manu Vashistha
¡¡¡●टीस●¡¡¡
¡¡¡●टीस●¡¡¡
Dr Manju Saini
चाँद
चाँद
ओंकार मिश्र
तुम्हारी निगाहें
तुम्हारी निगाहें
इंजी. संजय श्रीवास्तव
मैने वक्त को कहा
मैने वक्त को कहा
हिमांशु Kulshrestha
मेरे पास खिलौने के लिए पैसा नहीं है मैं वक्त देता हूं अपने ब
मेरे पास खिलौने के लिए पैसा नहीं है मैं वक्त देता हूं अपने ब
Ranjeet kumar patre
मृगनयनी
मृगनयनी
Kumud Srivastava
"इस्तिफ़सार" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
"अनमोल"
Dr. Kishan tandon kranti
आज भगवान का बनाया हुआ
आज भगवान का बनाया हुआ
प्रेमदास वसु सुरेखा
🙅शायद🙅
🙅शायद🙅
*प्रणय प्रभात*
विरह की वेदना
विरह की वेदना
surenderpal vaidya
एक सच
एक सच
Neeraj Agarwal
पर्यावरण और प्रकृति
पर्यावरण और प्रकृति
Dhriti Mishra
यही तो मजा है
यही तो मजा है
Otteri Selvakumar
कहां जाके लुकाबों
कहां जाके लुकाबों
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
2398.पूर्णिका
2398.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
खुद से रूठा तो खुद ही मनाना पड़ा
खुद से रूठा तो खुद ही मनाना पड़ा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
दीवानगी
दीवानगी
Shyam Sundar Subramanian
Loading...