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25 Mar 2024 · 1 min read

3178.*पूर्णिका*

3178.*पूर्णिका*
🌷 मंजिल ऐसी नहीं मिलती🌷
22 2212 22
मंजिल ऐसी नहीं मिलती।
खुशियाँ ऐसी नहीं मिलती।।
आगे बढ़ मेहनत अक्ल से।
कलियाँ ऐसी नहीं खिलती।।
अपनी जगह पर रह कायम।
पत्तियाँ ऐसी नहीं हिलती।।
यारी अपनी यहाँ संघर्ष ।
घासे ऐसी नहीं छिलती।।
छूते सच आसमां खेदू ।
अरमाँ ऐसी नहीं पलती ।।
…….✍ डॉ .खेदूभारती”सत्येश”
25-03-2024सोमवार

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