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7 Jul 2021 · 1 min read

रहें सलामत वो

ठाने रहते हैं सदा अपनों से अदावत वो।
ढाते हैं सब पे सितम बनके इक क़यामत वो।
लिहाज़ है ही नहीं उनको बड़े छोटे का-
हर घड़ी ढूंढते हैं मौका -ए-ज़लालत वो।

करके गुस्ताखियां रखते नहीं नदामत वो।
अपने ही लोगों की करते सदा खिलाफ़त वो।
दिल दुखाते हैं चोट वो यकीं पे करते हैं-
फिर भी देता हूं दुआएं रहें सलामत वो।

रिपुदमन झा “पिनाकी”
धनबाद (झारखण्ड)
स्वरचित एवं मौलिक

Language: Hindi
2 Likes · 298 Views

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