Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Apr 2023 · 1 min read

*दोहा*

दोहा
पड़ी समय की देखिए, कैसी निर्मम चोट
मॉंग रियासत में रहे, राजा-रानी वोट
रचयिता : रवि प्रकाश, रामपुर

Language: Hindi
367 Views
Books from Ravi Prakash
View all

You may also like these posts

मसल डाली मेरी इज्जत चंद लम्हों में
मसल डाली मेरी इज्जत चंद लम्हों में
Phool gufran
पूर्ण शरद का चंद्रमा,  देख रहे सब लोग
पूर्ण शरद का चंद्रमा, देख रहे सब लोग
Dr Archana Gupta
सत्य परख
सत्य परख
Rajesh Kumar Kaurav
दीपावली
दीपावली
Deepali Kalra
शाश्वत सत्य
शाश्वत सत्य
Ritu Asooja
फिर एक समस्या
फिर एक समस्या
A🇨🇭maanush
उम्मीद बाक़ी है
उम्मीद बाक़ी है
Dr. Rajeev Jain
सबकी अपनी जिन्दगी है
सबकी अपनी जिन्दगी है
Saraswati Bajpai
मनाओ जश्न तुम मेरे दोस्तों
मनाओ जश्न तुम मेरे दोस्तों
gurudeenverma198
विचारों में मतभेद
विचारों में मतभेद
Dr fauzia Naseem shad
3019.*पूर्णिका*
3019.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
क़िस्मत की सज़ा
क़िस्मत की सज़ा
Rekha khichi
Banaras
Banaras
Sahil Ahmad
अब मुझे यूं ही चलते जाना है: गज़ल
अब मुझे यूं ही चलते जाना है: गज़ल
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
आँखों में अब बस तस्वीरें मुस्कुराये।
आँखों में अब बस तस्वीरें मुस्कुराये।
Manisha Manjari
“परिंदे की अभिलाषा”
“परिंदे की अभिलाषा”
DrLakshman Jha Parimal
नशा तेरी
नशा तेरी
हिमांशु Kulshrestha
चलो अयोध्या रामलला के, दर्शन करने चलते हैं (भक्ति गीत)
चलो अयोध्या रामलला के, दर्शन करने चलते हैं (भक्ति गीत)
Ravi Prakash
शब्दों की आवाज
शब्दों की आवाज
Vivek Pandey
तेवरी
तेवरी
कवि रमेशराज
'तिमिर पर ज्योति'🪔🪔
'तिमिर पर ज्योति'🪔🪔
पंकज कुमार कर्ण
"क्या-क्या करते"
Dr. Kishan tandon kranti
भिखारी कविता
भिखारी कविता
OM PRAKASH MEENA
काश कुछ ख्वाब कभी सच ही न होते,
काश कुछ ख्वाब कभी सच ही न होते,
Kajal Singh
एक
एक "सहेली" एक "पहेली"
विशाल शुक्ल
रिश्ता दिल से होना चाहिए,
रिश्ता दिल से होना चाहिए,
Ranjeet kumar patre
☺️
☺️
*प्रणय*
हम सबके पास शाम को घर लौटने का ऑप्शन रहना ज़रूरी है...हम लाइ
हम सबके पास शाम को घर लौटने का ऑप्शन रहना ज़रूरी है...हम लाइ
पूर्वार्थ
घर में बैठक अब कहां होती हैं।
घर में बैठक अब कहां होती हैं।
Neeraj Agarwal
जब मैं मर जाऊं तो कफ़न के जगह किताबों में लपेट देना
जब मैं मर जाऊं तो कफ़न के जगह किताबों में लपेट देना
Keshav kishor Kumar
Loading...