Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Sep 2023 · 1 min read

चंद्रयान-थ्री

बचपन मे माँ कहती थी कि, यह चंदा मेरे मामा है।
सोचा करता था मैं तब घर, कैसे इनके जाना है।।

वहाँ सुनहली बालों वाली, नानी बैठी चरखा लेकर।
लाड़ लड़ाएगी वह हमको, ढेरों खेल खिलौने देकर।।

पर चंद्रयान-थ्री घुसपैठिया, सतह चाँद की छू बैठा।
पोल खुली सारी उनकी, सुंदरता पर था जो ऐठा।।

दिखे स्वेत से मखमली मिट्टी, पर खड्डों से भरा पड़ा।
बर्फीले टीलों के बीच न, कोई भी दिखता पेड़ खड़ा।।

कलुषित मन होगा उनका, महबूबा जो इनको जाने।
चाँद सी सूरत वाली कैसे, खुद को इनकी बहना माने।।

सहज सुलभ हो आना- जाना, घर अंगना एकसार हुआ।
चाँद छूने की कल्पना देखो, अब कितना साकार हुआ।।

प्रेमी प्यारे कमर को कस ले, थे चाँद को जो तोड़ने वाले।
न जाने कब माँग ले प्रेमिका, संग इनके गिन- गिन तारे।।

कवियों की उपमा खो गयी, प्रीत के गीत बदल जाएगी।
चन्द्रमुखी गर कह बैठे तो, लेकर बेलन बीबी दौड़ायेगी।।

खैर चलो ये अच्छा ही हुआ, जो नींद से सबको जगा दिए।
भारत नही किसी से पीछे, दुनिया वालों को यह बता दिए।।

आज हमारी धरती अम्मा, ने चाँद को राखी भिजवाई।
दूर नही है वह दिन भी जो, मामा घर होगा आवा-जाई।।

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, अब चंदा पर भी लहराएगा।
एक साथ मिल एक स्वरों में, जन गण मन जग गायेगा।।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप” (सर्वाधिकार सुरक्षित ०४/०९/२०२३)

Language: Hindi
1 Like · 242 Views

You may also like these posts

****शीतल प्रभा****
****शीतल प्रभा****
Kavita Chouhan
वो हमें भूल ही नहीं सकता
वो हमें भूल ही नहीं सकता
Dr fauzia Naseem shad
* अध्यापक *
* अध्यापक *
surenderpal vaidya
पर्व दशहरा आ गया
पर्व दशहरा आ गया
Dr Archana Gupta
*जीता हमने चंद्रमा, खोज चल रही नित्य (कुंडलिया )*
*जीता हमने चंद्रमा, खोज चल रही नित्य (कुंडलिया )*
Ravi Prakash
दलित साहित्य / ओमप्रकाश वाल्मीकि और प्रह्लाद चंद्र दास की कहानी के दलित नायकों का तुलनात्मक अध्ययन // आनंद प्रवीण//Anandpravin
दलित साहित्य / ओमप्रकाश वाल्मीकि और प्रह्लाद चंद्र दास की कहानी के दलित नायकों का तुलनात्मक अध्ययन // आनंद प्रवीण//Anandpravin
आनंद प्रवीण
" जंजीर "
Dr. Kishan tandon kranti
शून्य
शून्य
उमेश बैरवा
रिश्ते
रिश्ते
Mangilal 713
अब तू किसे दोष देती है
अब तू किसे दोष देती है
gurudeenverma198
लोकतंत्र की आड़ में तानाशाही ?
लोकतंत्र की आड़ में तानाशाही ?
Shyam Sundar Subramanian
मन की बात
मन की बात
Ruchi Sharma
हमारी प्यारी हिंदी
हमारी प्यारी हिंदी
पूनम दीक्षित
हर इंसान होशियार और समझदार है
हर इंसान होशियार और समझदार है
पूर्वार्थ
- तेरे सामने ही रहु -
- तेरे सामने ही रहु -
bharat gehlot
वह मुझे दोस्त कहता, और मेरी हर बेबसी पर हँसता रहा ।
वह मुझे दोस्त कहता, और मेरी हर बेबसी पर हँसता रहा ।
TAMANNA BILASPURI
Future Royal
Future Royal
Tharthing zimik
मैं दीपक बनकर जलता हूं
मैं दीपक बनकर जलता हूं
Manoj Shrivastava
राष्ट्रीय विकास
राष्ट्रीय विकास
Rahul Singh
जीवन साथी,,,दो शब्द ही तो है,,अगर सही इंसान से जुड़ जाए तो ज
जीवन साथी,,,दो शब्द ही तो है,,अगर सही इंसान से जुड़ जाए तो ज
Shweta Soni
सोला साल की उमर भी
सोला साल की उमर भी
Shinde Poonam
कुछ ही दिन में दिसंबर आएगा,
कुछ ही दिन में दिसंबर आएगा,
Jyoti Roshni
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
चलो , फिर करते हैं, नामुमकिन को मुमकिन ,
चलो , फिर करते हैं, नामुमकिन को मुमकिन ,
Atul Mishra
निस्वार्थ प्रेम
निस्वार्थ प्रेम
Shutisha Rajput
एक छोटी सी बह्र
एक छोटी सी बह्र
Neelam Sharma
अहम जब बढ़ने लगता🙏🙏
अहम जब बढ़ने लगता🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
कहनी चाही कभी जो दिल की बात...
कहनी चाही कभी जो दिल की बात...
Sunil Suman
अपने हुस्न पर इतना गुरूर ठीक नहीं है,
अपने हुस्न पर इतना गुरूर ठीक नहीं है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
व्यंजन की कविता
व्यंजन की कविता
Mansi Kadam
Loading...