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14 Feb 2024 · 1 min read

इस ज़िंदगानी में

फक़्त चार दिन की इस ज़िंदगानी में ।
फ़ानी क़ायनात मेरी क्या होगी ।
मेरा होकर भी जब कुछ नहीं मेरा ।
जिस्म और रूह भी मेरी क्या होगी ।।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
4 Likes · 118 Views
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