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19 Nov 2023 · 1 min read

🥀*गुरु चरणों की धूल* 🥀

🥀*गुरु चरणों की धूल* 🥀
गीतिका-आधार छंद-चामर छन्द
मापनी-२१२ १२१ २१२ १२१ २१२
समांत-आर;पदांत-‘दो
सुर सरि की धारा मस्तिष्क से निकार दो।
भाव मन विचार शारदे शुष्क सार दो।।
भान हो प्रज्ञान हो शारदे का गुणगान,
शारदे माँ वीणा वादिनी भक्ति का सुसार दो।
मातृ भूमि पे माँ मर मिट जाऊं भारती,
दुष्टों की दुष्टा माँ पल में संहार दो।।
भारत में भारती होवै तिहारी आरती,
मानव मन मस्तिष्क में शुद्ध विचार दो।।
कामना है मन मन्दिर में विराज महाँ,
श्रद्धा उपवन में रँगी राही अपार दो।।
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
झाँसी उ•प्र•

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