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29 Sep 2022 · 1 min read

💐 मेरी तलाश💐

डॉ अरुण कुमार शास्त्री 💐एक अबोध बालक 💐
अरुण अतृप्त

💐 मेरी तलाश 💐
समतल ज़मी
तलाशते
ये पर्वतों के रास्ते
हुई जिंदगी निढाल
एक घर के बास्ते
तमाम उम्र
निकल गई
किसी की
तलाश में
राह से भटक गई
बीच में लटक गई
न घर मिला
न सजन मिला
हांथ से फिसल गई
रेत सी खिसक गई
समतल ज़मी
तलाशते
ये पर्वतों के रास्ते

3 Likes · 3 Comments · 165 Views
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