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11 Feb 2023 · 1 min read

💐इश्क़ में फ़क़्र होना भी शर्त है💐

##मणिकर्णिका
##प्रॉमिस तो ईश्वर के लिए है
##तुम ईश्वर हो क्या?
##चलो माना तो।
##कोई भाव नहीं,कैसा भी
##कभी प्रायश्चित किया क्या?
##लिखना मेरा नशा है।
##ऐसे ही लिखेंगे
##दैनिक गीत लिखता हूँ।

इश्क़ में फ़क़्र होना भी शर्त है,
आज़माने पर हर्ज़ होगा ही,
नसीहत कभी उनसे मिली ही नहीं,
नहीं कभी मेरे हाथ पर हाथ फेरा,
बहुत कुछ लुटाया मैंने, उन्होंने देखा नहीं,
फिर क्यों डाले रहे मेरे दिल पर घेरा?
इश्क़ में अश्क़ गिरना भी शर्त है,
आज़माने पर हर्ज़ होगा ही।।1।।
कभी मिले तो मुबारक जरूर देंगे,
सभी गमों और खुशियों का हिसाब देंगे,
तुम भी करना अपने सवाल जबाब,
तुम्हारे हाथों से ही गुलाब लेंगें,
इश्क़ में इन्तजार भी शर्त है,
आज़माने पर हर्ज़ होगा ही।।2।।
वो पतझड़ लगे न मुस्कुराए तो,
क्या कहें वो कभी आएँ जाएँ तो?
मंजिल भी तय करते ग़र साथ देते,
क्या बचा है कभी उनसे मिले तो?
इश्क़ में नींद न आना भी शर्त है,
आज़माने पर हर्ज़ होगा ही।।3।।
कोई अजाब नहीं है सच मानो,
बहुत बैचेन हूँ मैं सच मानो,
अब से सावन जलायेंगे मुझे,
तुम भी कैसे बचोगे सच मानो,
इश्क़ में रोना मुस्कुराना भी शर्त है,
आज़माने पर हर्ज़ होगा ही।।4।।

फ़क़्र-कंगाली, साधुता, निर्धनता
अज़ाब-दुःख,कष्ट,यातना, तकलीफ़

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
Tag: गीत
492 Views
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