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14 Jan 2024 · 1 min read

🎊🎉चलो आज पतंग उड़ाने

🎊🎉चलो आज पतंग उड़ाने
नील गगन की ऊंचाई तक
रंग बिरंगे पतंगों के साथ
मॉन्झा की डोरी पकड़े हुए हाथ में
अपने जीवन के अरमानों को
आज खुले आसमान में लहरायें
चलो आज सतरँगी बहारों में कुछ
नया मोड़ देकर उन्हें हवाओं के रुख से नई दिशाओं में लहरायें
चलो आज जीवन का नया पतंग
उड़ाने कहीं दूर चले मन को बहलाये
💐🌹💐🎊🎉🎊🎉
पतंग से प्रीत बना पवित्र विचार रखो
त से तंदरुस्ती कायम रखो तिल गुड़ खाकर
गगन जैसी सोच कायम रखो विशाल हॄदय बनाये रखो
अपने हृदय रूपी आकाश में करुणा दया प्रेम के सागर भर लो
सदभावना सहनशीलता सहिष्णुता संयम पूर्वक
पतंग उड़ाये
ईर्ष्या द्वेष पूर्ण भावनाओं को दूर भगाये अहंकार काम रूपी क्रोध को काटें और सुसंस्कारित समझदारी भावनाओं के पतंग को लुटे
सनकुंचित मानसिकता को छोड़ दें।
शशिकला व्यास शिल्पी ✍️🙏🌹

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