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9 Dec 2022 · 1 min read

🌹🌺कैसे कहूँ मैं अकेला हूँ, तुम्हारी याद जो है संग में🌺🌹

##मणिकर्णिका##
##बौनी,तुम्हारे हिस्से में दुःख और डर दोनों हैं##

कैसे कहूँ मैं अकेला हूँ,
तुम्हारी याद जो है संग में,
मैं तेरे बहुत नज़दीक जा पहुँचा,
तुम फिर क्यों?दूर जाते हो,
तुम्हें देखूँ में हर हद तक,
तुम न अपनी सूरत दिखाते हो,
मैं अभी भी सबेरा हूँ,
कैसे कहूँ मैं अकेला हूँ,
तुम्हारी याद जो है संग में।।1।।
छोड़ी सभी बातें,
वो मुलाकात भी छोड़ी,
परहेज़ है उन ख़्यालों का,
जो न छेड़े रागिनी तेरी,
मैं उड़ता हुआ परिन्दा हूँ,
कैसे कहूँ मैं अकेला हूँ,
तुम्हारी याद जो है संग में।।2।।
कोई सवाल था शक का,
तुम्हें जबाब मिलता सच का,
वो सुने ही नहीं मेरी बातों को,
न अब फ़र्क है न तब फ़र्क था,
तेरे बिना भी मैं जिन्दा हूँ,
कैसे कहूँ मैं अकेला हूँ,
तुम्हारी याद जो है संग में।।3।।
राहों के मोड़ पर मिलना,
जहाँ सोचा था अब वहीं मिलना,
कोई इशारा भी तुम्ही करना,
वो हकीक़त से सँवारा हो,
मैं उजड़ा हुआ बसेरा हूँ,
कैसे कहूँ मैं अकेला हूँ,
तुम्हारी याद जो है संग में।।4।।

©®अभिषेक: पाराशरः

Language: Hindi
Tag: गीत
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