Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Jun 2022 · 1 min read

✍️वो मील का पत्थर….!

✍️वो मील का पत्थर….!✍️
———————-–—-//
रोज मेरे
ख़्वाब में
एक मील का
पत्थर आता है
और मुझसे मेरे शहर
का पता पूछता है…!
मैं हैरान परेशान
मेरे जिस्म पर
कोई सम्त का
निशान भी नहीं
ना मेरे दिल के अंदर से
कोई रास्ता गुजरता है
मेरे शहर पहुँचने का…
फिर भी…
वो मील का पत्थर
मेरे नींद के साथ
हद कर जाता है ।
शहर को ना भुलाने
की जिद कर जाता है ।।

वो मील का पत्थर….!
———————————–//
✍️”अशांत”शेखर✍️
12/06/2022

1 Like · 523 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
खत उसनें खोला भी नहीं
खत उसनें खोला भी नहीं
Sonu sugandh
पुस्तक
पुस्तक
Sangeeta Beniwal
■ आज नहीं अभी 😊😊
■ आज नहीं अभी 😊😊
*Author प्रणय प्रभात*
सत्य कहाँ ?
सत्य कहाँ ?
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
सुप्रभात
सुप्रभात
डॉक्टर रागिनी
जी-२० शिखर सम्मेलन
जी-२० शिखर सम्मेलन
surenderpal vaidya
कदम बढ़े  मदिरा पीने  को मदिरालय द्वार खड़काया
कदम बढ़े मदिरा पीने को मदिरालय द्वार खड़काया
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
स्वामी श्रद्धानंद का हत्यारा, गांधीजी को प्यारा
स्वामी श्रद्धानंद का हत्यारा, गांधीजी को प्यारा
कवि रमेशराज
I want to tell you something–
I want to tell you something–
पूर्वार्थ
2632.पूर्णिका
2632.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
ओढ़कर कर दिल्ली की चादर,
ओढ़कर कर दिल्ली की चादर,
Smriti Singh
कुदरत है बड़ी कारसाज
कुदरत है बड़ी कारसाज
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
ख़याल
ख़याल
नन्दलाल सुथार "राही"
अब किसे बरबाद करोगे gazal/ghazal By Vinit Singh Shayar
अब किसे बरबाद करोगे gazal/ghazal By Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
भगवन नाम
भगवन नाम
लक्ष्मी सिंह
अपना दिल
अपना दिल
Dr fauzia Naseem shad
विजय हजारे
विजय हजारे
Dr. Pradeep Kumar Sharma
जब कोई बात समझ में ना आए तो वक्त हालात पर ही छोड़ दो ,कुछ सम
जब कोई बात समझ में ना आए तो वक्त हालात पर ही छोड़ दो ,कुछ सम
Shashi kala vyas
श्री राम मंदिर
श्री राम मंदिर
Mukesh Kumar Sonkar
*दुराचारी का अक्सर अंत, अपने आप होता है (मुक्तक)*
*दुराचारी का अक्सर अंत, अपने आप होता है (मुक्तक)*
Ravi Prakash
सिर्फ तेरे चरणों में सर झुकाते हैं मुरलीधर,
सिर्फ तेरे चरणों में सर झुकाते हैं मुरलीधर,
कार्तिक नितिन शर्मा
खुद से मुहब्बत
खुद से मुहब्बत
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
दिल का हर अरमां।
दिल का हर अरमां।
Taj Mohammad
पितृ दिवस पर....
पितृ दिवस पर....
डॉ.सीमा अग्रवाल
मेरी कविताएं पढ़ लेना
मेरी कविताएं पढ़ लेना
Satish Srijan
पिछले पन्ने 7
पिछले पन्ने 7
Paras Nath Jha
एक पौधा तो अपना भी उगाना चाहिए
एक पौधा तो अपना भी उगाना चाहिए
कवि दीपक बवेजा
गांव की ख्वाइश है शहर हो जानें की और जो गांव हो चुके हैं शहर
गांव की ख्वाइश है शहर हो जानें की और जो गांव हो चुके हैं शहर
Soniya Goswami
ग़ज़ल/नज़्म - दस्तूर-ए-दुनिया तो अब ये आम हो गया
ग़ज़ल/नज़्म - दस्तूर-ए-दुनिया तो अब ये आम हो गया
अनिल कुमार
"क्रूरतम अपराध"
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...