Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Feb 2023 · 1 min read

■ प्रसंगवश…एक प्रसंग

#प्रसंगवश…
■ एक और प्रसंग
【प्रणय प्रभात】
आपको रामायण के “अरण्य-कांड” का “जयंत प्रसंग” तो याद होगा। श्री राम प्रभु को भगवती सीता का श्रृंगार करते देख जयंत को भ्रम हुआ। देवराज इंद्र के पुत्र जयंत ने राम जी की परीक्षा का दुस्साहस किया। काग-रूप में मां सीता के श्रीचरणों में चोंच का प्रहार किया और उड़ चला। उसे पता नहीं था कि प्रभु द्वारा तीर बना कर छोड़ी गई सींक उसके पीछे लग जाएगी। रक्षा न इंद्रलोक में होगी, न ब्रह्मलोक में। यहां तक कि देवाधिदेव महादेव भी उसे शरण नहीं देंगे। अंततः लौटना उन्हीं चरणों मे पड़ेगा, जिन पर प्रहार किया गया था। प्राणदान तो दयावश मिल जाएगा, किंतु एक नेत्र गंवा कर। छोटा सा यह प्रसंग एक बार फिर प्रासंगिक हो रहा है।
अनगिनत जयंत मति-भ्रष्ट हो कर वही चेष्टा कर रहे हैं। जानकी-रूपा आस्था पर प्रहार का दुस्साहस दिखा रहे हैं। बाप-दादा कलिकाल के प्रभाव में प्रश्रय देने की धृष्टता कर रहे हैं। उन्हें संभवतः आभास नहीं कि करुणा-निधान की दृष्टि उनकी धूर्त्तताओं पर है। कुकर्म का दंड मिलना अवश्यम्भावी है। सहिष्णुता के राम का कोप उन्हें भोगना ही पड़ेगा। प्राण भले ही बच जाएं। एक अंग तो नष्ट होकर ही रहेगा। इस बार आंख नहीं संभवतः जीभ। जो अति-उद्दंड और विषाक्त बनी हुई है। यह एक अटल सनातनी का अखंड विश्वास है। जो कदापि खंडित नहीं होगा। बोलो जय राम जी की।।
【प्रणय प्रभात】

1 Like · 212 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
एक मन
एक मन
Dr.Priya Soni Khare
आ ख़्वाब बन के आजा
आ ख़्वाब बन के आजा
Dr fauzia Naseem shad
आज़ादी के दीवाने
आज़ादी के दीवाने
करन ''केसरा''
2483.पूर्णिका
2483.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
😢आज की आवाज़😢
😢आज की आवाज़😢
*प्रणय प्रभात*
माता सति की विवशता
माता सति की विवशता
SHAILESH MOHAN
प्यार में ही तकरार होती हैं।
प्यार में ही तकरार होती हैं।
Neeraj Agarwal
जिंदगी में सफ़ल होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जिंदगी टेढ़े
जिंदगी में सफ़ल होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जिंदगी टेढ़े
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
नशा त्याग दो
नशा त्याग दो
Shyamsingh Lodhi Rajput (Tejpuriya)
"मेरी जिम्मेदारी "
Pushpraj Anant
चंद्रयान ने चांद से पूछा, चेहरे पर ये धब्बे क्यों।
चंद्रयान ने चांद से पूछा, चेहरे पर ये धब्बे क्यों।
सत्य कुमार प्रेमी
कजरी
कजरी
प्रीतम श्रावस्तवी
सूर्य तम दलकर रहेगा...
सूर्य तम दलकर रहेगा...
डॉ.सीमा अग्रवाल
कभी चाँद को देखा तो कभी आपको देखा
कभी चाँद को देखा तो कभी आपको देखा
VINOD CHAUHAN
गाँधी हमेशा जिंदा है
गाँधी हमेशा जिंदा है
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
9) “जीवन एक सफ़र”
9) “जीवन एक सफ़र”
Sapna Arora
*प्राण-प्रतिष्ठा सच पूछो तो, हुई राष्ट्र अभिमान की (गीत)*
*प्राण-प्रतिष्ठा सच पूछो तो, हुई राष्ट्र अभिमान की (गीत)*
Ravi Prakash
*मोर पंख* ( 12 of 25 )
*मोर पंख* ( 12 of 25 )
Kshma Urmila
लक्ष्य एक होता है,
लक्ष्य एक होता है,
नेताम आर सी
प्यासा के कुंडलियां (दारू -मदिरा) विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'
प्यासा के कुंडलियां (दारू -मदिरा) विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'
Vijay kumar Pandey
हम कहाँ कोई जमीं या
हम कहाँ कोई जमीं या
Dr. Sunita Singh
//खलती तेरी जुदाई//
//खलती तेरी जुदाई//
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
भगवा रंग में रंगें सभी,
भगवा रंग में रंगें सभी,
Neelam Sharma
चमकते चेहरों की मुस्कान में....,
चमकते चेहरों की मुस्कान में....,
कवि दीपक बवेजा
अच्छे दिनों की आस में,
अच्छे दिनों की आस में,
Befikr Lafz
मैं ना जाने क्या कर रहा...!
मैं ना जाने क्या कर रहा...!
भवेश
कई जीत बाकी है कई हार बाकी है, अभी तो जिंदगी का सार बाकी है।
कई जीत बाकी है कई हार बाकी है, अभी तो जिंदगी का सार बाकी है।
Vipin Singh
आबाद मुझको तुम आज देखकर
आबाद मुझको तुम आज देखकर
gurudeenverma198
मीनू
मीनू
Shashi Mahajan
जग के जीवनदाता के प्रति
जग के जीवनदाता के प्रति
महेश चन्द्र त्रिपाठी
Loading...