Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Mar 2023 · 2 min read

■ नज़्म (ख़ुदा करता कि तुमको)

■ दिल की नज्म : दिमाग़ के नाम
【प्रणय प्रभात】

★ जिसे तुम इश्क़ समझे हो छलावा बस छलावा है,
जिसे चाहत समझते हो, दिखावा ही दिखावा है।
तुम्हारा इश्क़ सहरा में, महज कोरा भुलावा है,
तुम्हारा इश्क़ क्या, झूठे कसीदों के अलावा है?
तुम्हें तो इश्क़ की भाषा, बिना बोले समझनी थी,
तुम्हें तो इश्क़ की क़ीमत, बिना तोले समझनी थी।
तुम्हें तो इश्क़ की गठरी, बिना खोले समझनी थी,
तुम्हें तो इश्क़ की ताक़त, बिना डोले समझनी थी।
लगा मुझको कि तुम ख़ुद इश्क़ के जज़्बात समझोगे,
मैं लब खोलूं ना खोलूं, फिर भी मेरी बात समझोगे।
कहोगे दिन को दिन तो रात को बस रात समझोगे,
भले मुश्किल हो दूरी, बीच के हालात समझोगे।
मगर ये क्या उलझकर रह गए तुम एक महफ़िल में,
तुम्हें बहती लहर भाई, रही निस्बत न साहिल में।
तुम्हें तो फ़र्क़ तक करना न आया हक़ में बातिल में,
न जाने प्यार की परिभाषा गढ़ ली कौन सी दिल में?
ख़ुदा करता कि तुमको, इश्क़ का मानी समझ आता।।

★ मगर तुम थे कि तुमको, इश्क़ जिस्मों में नज़र आया,
मगर तुम थे कि तुमको, सच तिलिस्मों में नज़र आया।
मगर तुम थे कि तुमको, इश्क़ रस्मों में नज़र आया,
मगर तुम थे कि तुमको, इश्क़ किस्मों में नजर आया।
पढ़ा होता अगरचे फ़लसफ़ा, तुमने मुहब्बत का,
तो रूसवा इस तरह करते नहीं तुम नाम उल्फ़त का।
तुम्हें महसूस होता, इश्क़ ही रस्ता है राहत का,
तुम्हें ख़ुद ही समझ आता कि क्या है मोल चाहत का।
मुसीबत ये रही बस, इश्क़ तुमने उम्र में परखा,
मुसीबत ये रही बस, इश्क़ तुमने ज़ात में निरखा।
मुसीबत ये रही बस, इश्क़ को औक़ात में बांटा,
मुसीबत ये रही बस, इश्क़ सूरत-शक़्ल में छांटा।
ख़ुदा करता कि तुमको, इश्क़ का मानी समझ आता।।

★ समन्दर आसमां छूने की ख़ातिर, क्यों उछलता है?
या वो बच्चा कोई, जो चांद पाने को मचलता है।
वो क्या जो रेल की दो पटरियों के बीच चलता है?
नहीं है इश्क़ क्या वो जो कि दो आंखों में पलता है?
यक़ीनन इश्क़ वो जिसमें नहीं पाना है, खोना है,
यक़ीनन इश्क़ वो जिसमें, फ़क़त रोना ही रोना है।
यक़ीनन इश्क़ वो रिश्ता, जो नातों से सलोना है।
यक़ीनन इश्क़ वो, जिसमें कभी ना जीत होना है।
ख़ुदा करता कि तुमको, इश्क़ का मानी समझ आता।।
■ प्रणय प्रभात ■
श्योपुर (मध्यप्रदेश)

1 Like · 374 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*.....थक सा गया  हू...*
*.....थक सा गया हू...*
Naushaba Suriya
#दोहा-
#दोहा-
*प्रणय प्रभात*
जीवन चक्र
जीवन चक्र
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
23/204. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/204. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मेरी कलम से…
मेरी कलम से…
Anand Kumar
फिर जिंदगी ने दम तोड़ा है
फिर जिंदगी ने दम तोड़ा है
Smriti Singh
बस जाओ मेरे मन में
बस जाओ मेरे मन में
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
छलिया तो देता सदा,
छलिया तो देता सदा,
sushil sarna
अपने आँसू
अपने आँसू
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
धैर्य और साहस
धैर्य और साहस
ओंकार मिश्र
21-- 🌸 और वह? 🌸
21-- 🌸 और वह? 🌸
Mahima shukla
My Expressions
My Expressions
Shyam Sundar Subramanian
(दम)
(दम)
महेश कुमार (हरियाणवी)
आखिर कब तक
आखिर कब तक
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
आलता महावर
आलता महावर
Pakhi Jain
बाइस्कोप मदारी।
बाइस्कोप मदारी।
Satish Srijan
किधर चले हो यूं मोड़कर मुँह मुझे सनम तुम न अब सताओ
किधर चले हो यूं मोड़कर मुँह मुझे सनम तुम न अब सताओ
Dr Archana Gupta
मेरा भारत देश
मेरा भारत देश
Shriyansh Gupta
*मेरा आसमां*
*मेरा आसमां*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
करना था यदि ऐसा तुम्हें मेरे संग में
करना था यदि ऐसा तुम्हें मेरे संग में
gurudeenverma198
ग़ज़ल/नज़्म - वजूद-ए-हुस्न को जानने की मैंने पूरी-पूरी तैयारी की
ग़ज़ल/नज़्म - वजूद-ए-हुस्न को जानने की मैंने पूरी-पूरी तैयारी की
अनिल कुमार
बिगड़े हुए मुकद्दर पर मुकदमा चलवा दो...
बिगड़े हुए मुकद्दर पर मुकदमा चलवा दो...
Niharika Verma
मां
मां
Slok maurya "umang"
एक लम्हा है ज़िन्दगी,
एक लम्हा है ज़िन्दगी,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
अधर मौन थे, मौन मुखर था...
अधर मौन थे, मौन मुखर था...
डॉ.सीमा अग्रवाल
जवाब ना दिया
जवाब ना दिया
Madhuyanka Raj
पहचान तो सबसे है हमारी,
पहचान तो सबसे है हमारी,
पूर्वार्थ
🌹थम जा जिन्दगी🌹
🌹थम जा जिन्दगी🌹
Dr .Shweta sood 'Madhu'
*आयु मानव को खाती (कुंडलिया)*
*आयु मानव को खाती (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
एक श्वान की व्यथा
एक श्वान की व्यथा
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Loading...