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13 Apr 2023 · 1 min read

■ दोहा :-

■ दोहा :-
“उल्टी गंगा बह चली,
नज़दीकी अब रोग।
दवा बन गया फ़ासला
समझ रहे हैं लीग।।”

■प्रणय प्रभात■

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