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10 Feb 2023 · 1 min read

ਹਰ ਅਲਫਾਜ਼ ਦੀ ਕੀਮਤ

ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਹਰ ਅਲਫਾਜ਼ ਦੀ ਕੀਮਤ।
ਮੁੱਢੋਂ ਤੁਰੇ ਆ ਰਹੇ ਰਿਵਾਜ਼ ਦੀ ਕੀਮਤ।

ਖੰਭ ਕੁਤਰੇ ਹੋਏ ਪੰਛੀ ਤੋਂ ਜ਼ਰਾ ਪੁੱਛੋਂ
ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਪਰਵਾਜ਼ ਦੀ ਕੀਮਤ।

ਤਾਰ ਜੇ ਇੱਕ ਵੀ ਟੁੱਟ ਜਾਂਦੀ ਏ
ਰਹਿੰਦੀ ਨਹੀਂ ਕੋਈ, ਸਾਜ਼ ਦੀ ਕੀਮਤ।

ਜੁਬਾਨ ਕੱਟ ਕੇ ,ਸਮਾਜ ਦੇ ਜੁਬਾਨ ਵਾਲੇ
ਕਹਿੰਦੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਹਰ ਆਵਾਜ਼ ਦੀ ਕੀਮਤ।
ਸੁਰਿੰਦਰ ਕੌਰ

Language: Punjabi
189 Views
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