Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Jul 2016 · 1 min read

ग़ज़ल (बचपन यार अच्छा था)

जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी
बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था

बारीकी जमाने की, समझने में उम्र गुज़री
भोले भाले चेहरे में सयानापन समाता था

मिलते हाथ हैं लेकिन दिल मिलते नहीं यारों
मिलाकर हाथ, पीछे से मुझको मार जाता था

सुना है आजकल कि बह नियमों को बनाता है
बचपन में गुरूजी से जो अक्सर मार खाता था

उधर माँ बाप तन्हा थे इधर बेटा अकेला था
पैसे की ललक देखो दिन कैसे दिखाता था

जिसे देखे हुआ अर्सा , उसका हाल जब पूछा
बाकी ठीक है कहकर वह ताना मार जाता था

मदन मोहन सक्सेना

173 Views
You may also like:
कला
Saraswati Bajpai
सरल हो बैठे
AADYA PRODUCTION
!! नफरत सी है मुझे !!
गायक और लेखक अजीत कुमार तलवार
जीवनदाता वृक्ष
AMRESH KUMAR VERMA
आस्तीक भाग -नौ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सम्भल कर चलना ऐ जिन्दगी
Anamika Singh
दहेज़
आकाश महेशपुरी
✍️ये आज़माईश कैसी?✍️
'अशांत' शेखर
मैं आखिरी सफर पे हूँ
VINOD KUMAR CHAUHAN
ये दुनियां पूंछती है।
Taj Mohammad
श्री राम गुणगान (गीत)
Ravi Prakash
खड़ा बाँस का झुरमुट एक
Vishnu Prasad 'panchotiya'
जम्हूरियत
बिमल
जालिम कोरोना
Dr Meenu Poonia
पर्यावरण बचा लो,कर लो बृक्षों की निगरानी अब
Pt. Brajesh Kumar Nayak
भूख की अज़ीयत
Dr fauzia Naseem shad
मेरे बुद्ध महान !
मनोज कर्ण
जब जब परखा
shabina. Naaz
मजदूर हूॅं साहब
Deepak Kohli
सच्चाई लक्ष्मण रेखा की
AJAY AMITABH SUMAN
लुटेरों का सरदार
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
मां के तट पर
जगदीश लववंशी
बाल मनोविज्ञान
Pakhi Jain
बाल कहानी- चतुर और स्वार्थी लोमड़ी
SHAMA PARVEEN
बुद्ध का मज़ाक
Shekhar Chandra Mitra
बगीचे में फूलों को
Manoj Tanan
क्यों बीते कल की स्याही, आज के पन्नों पर छीटें...
Manisha Manjari
👁️✍️वाह-वाह तुम्हारे आँख का काजल✍️👁️
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
लिखता जा रहा है वह
gurudeenverma198
जैसी करनी वैसी भरनी
Ashish Kumar
Loading...