Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jul 2016 · 1 min read

ग़ज़ल ( जिंदगी का सफ़र)

ग़ज़ल ( जिंदगी का सफ़र)

बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम न मिल सके
जिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अंजान है

प्यासा पथिक और पास में बहता समुन्द्र देखकर
जिंदगी क्या है मदन , कुछ कुछ हुयी पहचान है

कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआ
इक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान है

इक दर्द का एहसास हमको हर समय मिलता रहा
ये बक्त की साजिश है या फिर बक्त का एहसान है

गर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाह
अब आज के इस दौर में दिखते नहीं इन्सान है

गैर बनकर पेश आते, बक्त पर अपने ही लोग
अपनो की पहचान करना अब नहीं आसान है

ग़ज़ल ( जिंदगी का ये सफ़र)
मदन मोहन सक्सेना

250 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सच ही सच
सच ही सच
Neeraj Agarwal
पुत्र एवं जननी
पुत्र एवं जननी
रिपुदमन झा "पिनाकी"
खुद की तलाश में मन
खुद की तलाश में मन
Surinder blackpen
"खुद्दारी"
Dr. Kishan tandon kranti
‘ विरोधरस ‘---8. || आलम्बन के अनुभाव || +रमेशराज
‘ विरोधरस ‘---8. || आलम्बन के अनुभाव || +रमेशराज
कवि रमेशराज
“दुमका संस्मरण 3” ट्रांसपोर्ट सेवा (1965)
“दुमका संस्मरण 3” ट्रांसपोर्ट सेवा (1965)
DrLakshman Jha Parimal
हर कस्बे हर मोड़ पर,
हर कस्बे हर मोड़ पर,
sushil sarna
निरंतर प्रयास ही आपको आपके लक्ष्य तक पहुँचाता hai
निरंतर प्रयास ही आपको आपके लक्ष्य तक पहुँचाता hai
Indramani Sabharwal
मेरी हर इक ग़ज़ल तेरे नाम है कान्हा!
मेरी हर इक ग़ज़ल तेरे नाम है कान्हा!
Neelam Sharma
ज़िन्दगी में हमेशा खुशियों की सौगात रहे।
ज़िन्दगी में हमेशा खुशियों की सौगात रहे।
Phool gufran
वीर तुम बढ़े चलो...
वीर तुम बढ़े चलो...
आर एस आघात
आओ न! बचपन की छुट्टी मनाएं
आओ न! बचपन की छुट्टी मनाएं
डॉ० रोहित कौशिक
जीवात्मा
जीवात्मा
Mahendra singh kiroula
कोई फैसला खुद के लिए, खुद से तो करना होगा,
कोई फैसला खुद के लिए, खुद से तो करना होगा,
Anand Kumar
बेसब्री
बेसब्री
PRATIK JANGID
अभिसप्त गधा
अभिसप्त गधा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बोलो जय जय गणतंत्र दिवस
बोलो जय जय गणतंत्र दिवस
gurudeenverma198
2317.पूर्णिका
2317.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
Yesterday ? Night
Yesterday ? Night
Otteri Selvakumar
सजल...छंद शैलजा
सजल...छंद शैलजा
डॉ.सीमा अग्रवाल
■ चल गया होगा पता...?
■ चल गया होगा पता...?
*Author प्रणय प्रभात*
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।
Shashi Dhar Kumar
छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री लड़ाई
छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री लड़ाई
Pravesh Shinde
गम के बगैर
गम के बगैर
Swami Ganganiya
तुम - दीपक नीलपदम्
तुम - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
मेरी माँ......
मेरी माँ......
Awadhesh Kumar Singh
ख़्वाब टूटा
ख़्वाब टूटा
Dr fauzia Naseem shad
आज 31 दिसंबर 2023 साल का अंतिम दिन है।ढूंढ रहा हूं खुद को कि
आज 31 दिसंबर 2023 साल का अंतिम दिन है।ढूंढ रहा हूं खुद को कि
पूर्वार्थ
*हाथ में पिचकारियाँ हों, रंग और गुलाल हो (मुक्तक)*
*हाथ में पिचकारियाँ हों, रंग और गुलाल हो (मुक्तक)*
Ravi Prakash
"शहीद साथी"
Lohit Tamta
Loading...