Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Oct 2016 · 1 min read

ख़ुदा जाने कैसी हवा ये चली है

इतनी भी हमसे , क्या बेरुखी है
न तू ही मिला न खबर ही मिली है
**************************
टूटे हैं जज्बात शाखों से दिल की
ख़ुदा जाने कैसी हवा ये चली है
**************************
कपिल कुमार
14/10/2016

Language: Hindi
200 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
योग का गणित और वर्तमान समस्याओं का निदान
योग का गणित और वर्तमान समस्याओं का निदान
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
मैं तो महज तकदीर हूँ
मैं तो महज तकदीर हूँ
VINOD CHAUHAN
चलो स्कूल
चलो स्कूल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Success Story-1
Success Story-1
Piyush Goel
त्वमेव जयते
त्वमेव जयते
DR ARUN KUMAR SHASTRI
3386⚘ *पूर्णिका* ⚘
3386⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
कविता
कविता
Alka Gupta
इतनी नाराज़ हूं तुमसे मैं अब
इतनी नाराज़ हूं तुमसे मैं अब
Dheerja Sharma
■ एक ही सलाह...
■ एक ही सलाह...
*प्रणय प्रभात*
प्रारब्ध का सत्य
प्रारब्ध का सत्य
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
मर्यादापुरुषोतम श्री राम
मर्यादापुरुषोतम श्री राम
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
How to say!
How to say!
Bidyadhar Mantry
कुंडलिया छंद विधान ( कुंडलिया छंद में ही )
कुंडलिया छंद विधान ( कुंडलिया छंद में ही )
Subhash Singhai
........?
........?
शेखर सिंह
उनको मेरा नमन है जो सरहद पर खड़े हैं।
उनको मेरा नमन है जो सरहद पर खड़े हैं।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
जिंदगी को जीने का तरीका न आया।
जिंदगी को जीने का तरीका न आया।
Taj Mohammad
"विदूषक"
Dr. Kishan tandon kranti
शहरी हो जरूर तुम,
शहरी हो जरूर तुम,
Dr. Man Mohan Krishna
टूटकर बिखरना हमें नहीं आता,
टूटकर बिखरना हमें नहीं आता,
Sunil Maheshwari
मिर्जा पंडित
मिर्जा पंडित
Harish Chandra Pande
कायम रखें उत्साह
कायम रखें उत्साह
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
जीवन के अंतिम पड़ाव पर लोककवि रामचरन गुप्त द्वारा लिखी गयीं लघुकथाएं
जीवन के अंतिम पड़ाव पर लोककवि रामचरन गुप्त द्वारा लिखी गयीं लघुकथाएं
कवि रमेशराज
कहना तुम ख़ुद से कि तुमसे बेहतर यहां तुम्हें कोई नहीं जानता,
कहना तुम ख़ुद से कि तुमसे बेहतर यहां तुम्हें कोई नहीं जानता,
Rekha khichi
राम तुम्हारे नहीं हैं
राम तुम्हारे नहीं हैं
Harinarayan Tanha
बिन पैसों नहीं कुछ भी, यहाँ कद्र इंसान की
बिन पैसों नहीं कुछ भी, यहाँ कद्र इंसान की
gurudeenverma198
बे-असर
बे-असर
Sameer Kaul Sagar
*सदियों से सुख-दुख के मौसम, इस धरती पर आते हैं (हिंदी गजल)*
*सदियों से सुख-दुख के मौसम, इस धरती पर आते हैं (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
लोग भी हमें अच्छा जानते होंगे,
लोग भी हमें अच्छा जानते होंगे,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
जल जंगल जमीन
जल जंगल जमीन
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अभागा
अभागा
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
Loading...