Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Jun 2023 · 1 min read

हृदय मे भरा अंधेरा घनघोर है,

हृदय मे भरा अंधेरा घनघोर है,
बाहर से शांत भीतर अनेकों शोर है,
ठहर सा गया है ये वक़्त, महज ये वक़्त नहीं,
खुद मे खुद को समझने समझाने का दौर है।

5 Likes · 458 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
होली आ रही है रंगों से नहीं
होली आ रही है रंगों से नहीं
Ranjeet kumar patre
दोहा त्रयी. . . सन्तान
दोहा त्रयी. . . सन्तान
sushil sarna
"इतिहास"
Dr. Kishan tandon kranti
❤️🌺मेरी मां🌺❤️
❤️🌺मेरी मां🌺❤️
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
गुमाँ हैं हमको हम बंदर से इंसाँ बन चुके हैं पर
गुमाँ हैं हमको हम बंदर से इंसाँ बन चुके हैं पर
Johnny Ahmed 'क़ैस'
ऊपर बने रिश्ते
ऊपर बने रिश्ते
विजय कुमार अग्रवाल
पति की खुशी ,लंबी उम्र ,स्वास्थ्य के लिए,
पति की खुशी ,लंबी उम्र ,स्वास्थ्य के लिए,
ओनिका सेतिया 'अनु '
मौन धृतराष्ट्र बन कर खड़े हो
मौन धृतराष्ट्र बन कर खड़े हो
DrLakshman Jha Parimal
अजीब हालत है मेरे दिल की
अजीब हालत है मेरे दिल की
Phool gufran
A setback is,
A setback is,
Dhriti Mishra
राम तेरी माया
राम तेरी माया
Swami Ganganiya
चल‌ मनवा चलें....!!!
चल‌ मनवा चलें....!!!
Kanchan Khanna
#व्यंग्य-
#व्यंग्य-
*प्रणय प्रभात*
सपना
सपना
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
सम्मान
सम्मान
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*हे तात*
*हे तात*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
पाॅंचवाॅं ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान समारोह -2024 संपन्न
पाॅंचवाॅं ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान समारोह -2024 संपन्न
Dr. Narendra Valmiki
कलाकारी में भी यूं चार चांद लगाते हैं,
कलाकारी में भी यूं चार चांद लगाते हैं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
बह्र ....2122  2122  2122  212
बह्र ....2122 2122 2122 212
Neelofar Khan
*बेफिक्री का दौर वह ,कहाँ पिता के बाद (कुंडलिया)*
*बेफिक्री का दौर वह ,कहाँ पिता के बाद (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
Untold
Untold
Vedha Singh
मुक्तक... छंद हंसगति
मुक्तक... छंद हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
विदंबना
विदंबना
Bodhisatva kastooriya
मौलिक विचार
मौलिक विचार
डॉ.एल. सी. जैदिया 'जैदि'
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन
Raju Gajbhiye
इन्द्रिय जनित ज्ञान सब नश्वर, माया जनित सदा छलता है ।
इन्द्रिय जनित ज्ञान सब नश्वर, माया जनित सदा छलता है ।
लक्ष्मी सिंह
माँ की ममता,प्यार पिता का, बेटी बाबुल छोड़ चली।
माँ की ममता,प्यार पिता का, बेटी बाबुल छोड़ चली।
Anil Mishra Prahari
*पेड़*
*पेड़*
Dushyant Kumar
मैं साहिल पर पड़ा रहा
मैं साहिल पर पड़ा रहा
Sahil Ahmad
हम शरीर हैं, ब्रह्म अंदर है और माया बाहर। मन शरीर को संचालित
हम शरीर हैं, ब्रह्म अंदर है और माया बाहर। मन शरीर को संचालित
Sanjay ' शून्य'
Loading...