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26 Jul 2023 · 1 min read

हुई बरसात टूटा इक पुराना, पेड़ था आख़िर

हुई बरसात टूटा इक पुराना, पेड़ था आख़िर
घनी थी छाँव जिसकी फूल-फल देने में था माहिर
कभी सोचा न था, जीना पड़ेगा, यार तेरे बिन
जहां रोता है मेरे साथ, क्यों होता मुझे जाहिर
महावीर उत्तरांचली

1 Like · 163 Views
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