Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Sep 2016 · 1 min read

हिन्‍दी (दोहा-ग़़ज़ल)

आज हिन्‍दी दिवस है। इस अवसर पर हिन्‍दी-उर्दू एकता के लिए हमारी गंगो-जमन तहज़ीब की तरह हिन्‍दी-उर्दू अदबियत को समर्पित मेरी ताज़ा दोहा-ग़ज़ल-
******************************************

हिन्दी भाषा की बने, ऐसी अब पहचान।
मेहनत से जैसे बने, कोई जब धनवान।
हिन्दी को भी गर्व से, अब बोलें हम आप,
खुशी मिले ज्यों दोगुनी, मिलता जब सम्मान।
वाहन, घर, महँगे वसन, मोबाइल का शौक,
हिन्दी का भी शौक अब, पालें सब इनसान।
ज्ञानी संत समाज में, फैलाते सुविचार।
हिन्दी के उत्थान का, छेड़ें अब अभियान।
‘आकुल’ हिंदी को मिले, ऐसी एक उड़ान।
मस्जिद में हों कीर्तन, मंदिर में अब अजान।

251 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
View all
You may also like:
ये वक्त कुछ ठहर सा गया
ये वक्त कुछ ठहर सा गया
Ray's Gupta
आबरू भी अपनी है
आबरू भी अपनी है
Dr fauzia Naseem shad
बादल बनके अब आँसू आँखों से बरसते हैं ।
बादल बनके अब आँसू आँखों से बरसते हैं ।
Neelam Sharma
नारी
नारी
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
Ek din ap ke pas har ek
Ek din ap ke pas har ek
Vandana maurya
■ दिवस विशेष तो विचार भी विशेष।
■ दिवस विशेष तो विचार भी विशेष।
*Author प्रणय प्रभात*
💐प्रेम कौतुक-305💐
💐प्रेम कौतुक-305💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
आलोचक-गुर्गा नेक्सस वंदना / मुसाफ़िर बैठा
आलोचक-गुर्गा नेक्सस वंदना / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
उलझनें हैं तभी तो तंग, विवश और नीची  हैं उड़ाने,
उलझनें हैं तभी तो तंग, विवश और नीची हैं उड़ाने,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
क्यों तुम उदास होती हो...
क्यों तुम उदास होती हो...
Er. Sanjay Shrivastava
*.....मै भी उड़ना चाहती.....*
*.....मै भी उड़ना चाहती.....*
Naushaba Suriya
!! वो बचपन !!
!! वो बचपन !!
Akash Yadav
वाचाल सरपत
वाचाल सरपत
आनन्द मिश्र
कोहिनूराँचल
कोहिनूराँचल
डिजेन्द्र कुर्रे
*पीयूष जिंदल: एक सामाजिक व्यक्तित्व*
*पीयूष जिंदल: एक सामाजिक व्यक्तित्व*
Ravi Prakash
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
हौसला
हौसला
डॉ. शिव लहरी
एक नम्बर सबके फोन में ऐसा होता है
एक नम्बर सबके फोन में ऐसा होता है
Rekha khichi
तुम तो ठहरे परदेशी
तुम तो ठहरे परदेशी
विशाल शुक्ल
नजरों को बचा लो जख्मों को छिपा लो,
नजरों को बचा लो जख्मों को छिपा लो,
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
"बिन स्याही के कलम "
Pushpraj Anant
हंसगति
हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
सावन का महीना
सावन का महीना
विजय कुमार अग्रवाल
"मकर संक्रान्ति"
Dr. Kishan tandon kranti
जबसे उनके हाथ पीले हो गये
जबसे उनके हाथ पीले हो गये
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बेइंतहा इश्क़
बेइंतहा इश्क़
Shekhar Chandra Mitra
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
हरदा अग्नि कांड
हरदा अग्नि कांड
GOVIND UIKEY
घायल तुझे नींद आये न आये
घायल तुझे नींद आये न आये
Ravi Ghayal
2275.
2275.
Dr.Khedu Bharti
Loading...