Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Oct 2016 · 1 min read

हास्य कविता-जब भी मिलेगा जाम

कल हमें कहीं जाने का एक पड़ा काम।
तभी रास्ते में लग गया बहुत बड़ा जाम।
टेम्पू और दो बसें अटी-सटी खड़ी थीं ।
लोगों के आने -जाने में बाधायें बड़ी थीं
दो बसों के बीच से कुछ पतले लोग निकल रहे थे ,
कुछ कुत्ते बसों के नीचे से होकर चल रहे थे ।।
हमने भी सोचा कि हम भी बीच से होकर निकल जायें,
अपनी जगह पर पहुँच कर जल्दी से काम कर आयें ।।
यही सोचकर हमने बीच से निकलना चाहा ,
हाथ पैर निकाले और अपना मोटा पेट बीच में सटाया ।।
हमें लगा कि हम बीच में गये फँस,
आश्चर्य चकित देख रहे थे हमें लोग हँस
इतने में उधर से एक मोटा व्यक्ति आया
आब न ताब देखा बीच में अपना मोटा पेट सटाया ।।
हम दोनों ओर बसों के बीच फँस रहे थे
हमें देख सभी लोग जोर जोर से हँस रहे थे ।।
इतना देख हम दोनों ने बहुत जोर लगाये,
कुछ फँसे थे दायें कुछ फँसे थे बायें ।।
हारे पहलवान से हम बीच में थे ठाड़े,
इस जोर की आजमाइश में हमने अपने कपड़े फाड़े।।
ऐसा लगा कि जैसे हमने योद्धा हों पछाड़े।।
भीगी बिल्ली से हम पढ़ रहे थे पहाड़े।।
इतनी देर में ड्राइवर ने बस की स्टार्ट,
जगह हो जाने पर जाम खुल गया फटाक ।।
हमने पकड़े कान खाई कसम फिर ऐसे न करेंगे काम ,
इंतजार कर लेंगे हमें जब भी मिलेगा जाम।।

Language: Hindi
1 Like · 1 Comment · 302 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
घमंड न करो ज्ञान पर
घमंड न करो ज्ञान पर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आ जाओ घर साजना
आ जाओ घर साजना
लक्ष्मी सिंह
मैं पढ़ने कैसे जाऊं
मैं पढ़ने कैसे जाऊं
Anjana banda
कृष्ण काव्य धारा एव हिंदी साहित्य
कृष्ण काव्य धारा एव हिंदी साहित्य
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सर्द हवाएं
सर्द हवाएं
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
* मुस्कुराते हुए *
* मुस्कुराते हुए *
surenderpal vaidya
चांद बहुत रोया
चांद बहुत रोया
Surinder blackpen
शब्दों में समाहित है
शब्दों में समाहित है
Dr fauzia Naseem shad
मायके से दुआ लीजिए
मायके से दुआ लीजिए
Harminder Kaur
तुम हमेशा से  मेरा आईना हो॥
तुम हमेशा से मेरा आईना हो॥
कुमार
वह बचपन के दिन
वह बचपन के दिन
Yogi Yogendra Sharma : Motivational Speaker
क्या हुआ गर नहीं हुआ, पूरा कोई एक सपना
क्या हुआ गर नहीं हुआ, पूरा कोई एक सपना
gurudeenverma198
गीत-14-15
गीत-14-15
Dr. Sunita Singh
सुंदर नयन सुन बिन अंजन,
सुंदर नयन सुन बिन अंजन,
Satish Srijan
करुणा के बादल...
करुणा के बादल...
डॉ.सीमा अग्रवाल
मतिभ्रष्ट
मतिभ्रष्ट
Shyam Sundar Subramanian
चिराग़ ए अलादीन
चिराग़ ए अलादीन
Sandeep Pande
मेरी भौतिकी के प्रति वैज्ञानिक समझ
मेरी भौतिकी के प्रति वैज्ञानिक समझ
Ms.Ankit Halke jha
बहुत से लोग आएंगे तेरी महफ़िल में पर
बहुत से लोग आएंगे तेरी महफ़िल में पर "कश्यप"।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
🚩मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है
🚩मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है
Pt. Brajesh Kumar Nayak
हे! राम
हे! राम
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
देखें क्या है राम में .... (पूरी रामचरित मानस अत्यंत संक्षिप्त शब्दों में)
देखें क्या है राम में .... (पूरी रामचरित मानस अत्यंत संक्षिप्त शब्दों में)
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
■ बेचारे...
■ बेचारे...
*Author प्रणय प्रभात*
वो खुशनसीब थे
वो खुशनसीब थे
Dheerja Sharma
रमेशराज की चिड़िया विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की चिड़िया विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
बेवफाई उसकी दिल,से मिटा के आया हूँ।
बेवफाई उसकी दिल,से मिटा के आया हूँ।
पूर्वार्थ
पीठ के नीचे. . . .
पीठ के नीचे. . . .
sushil sarna
शीर्षक : बरसात के दिनों में (हिन्दी)
शीर्षक : बरसात के दिनों में (हिन्दी)
Neeraj Agarwal
*रामचरितमानस में गूढ़ अध्यात्म-तत्व*
*रामचरितमानस में गूढ़ अध्यात्म-तत्व*
Ravi Prakash
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Loading...