Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 May 2024 · 1 min read

हाय वो बचपन कहाँ खो गया

ख्वाबों ख्यालों का जहाँ सो गया
हाय वो बचपन कहाँ खो गया

ढूंढता हूँ बहुत मैं आज कोने कोने
नही मिल रहे मिट्टी के वो खिलौने
हर कोई वस अब तन्हाँ हो गया
हाय वो बचपन………….

कहाँ हैं आज बचकाना अठखेली
वो बचपन बना जैसे कोई पहेली
हर कोई बस अब तन्हाँ हो गया
हाय वो बचपन…………..

कहीं भी नहीं दिखते पेड़ो पर झूले
वो मखमली अहसास कैसे हैं भूले
हर कोई बस अब तन्हाँ हो गया
हाय वो बचपन………….

बारिश देखते यूं सबका निकलना
कौन जानता है तितली पकड़ना
हर कोई बस अब तन्हाँ हो गया
हाय वो बचपन…………

‘V9द’ नहीं सजते हैं आज मेले
महफ़िल में भी दिल हैं यूँ अकेले
हर कोई बस अब तन्हाँ हो गया
हाय वो बचपन…………..

1 Like · 32 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from VINOD CHAUHAN
View all
You may also like:
दोहा -
दोहा -
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मेरे हौसलों को देखेंगे तो गैरत ही करेंगे लोग
मेरे हौसलों को देखेंगे तो गैरत ही करेंगे लोग
कवि दीपक बवेजा
सपना
सपना
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
— नारी न होती तो —
— नारी न होती तो —
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
क्या मिला है मुझको, अहम जो मैंने किया
क्या मिला है मुझको, अहम जो मैंने किया
gurudeenverma198
*सोता रहता आदमी, आ जाती है मौत (कुंडलिया)*
*सोता रहता आदमी, आ जाती है मौत (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
बधाई का गणित / मुसाफ़िर बैठा
बधाई का गणित / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
मैं प्यार के सरोवर मे पतवार हो गया।
मैं प्यार के सरोवर मे पतवार हो गया।
Anil chobisa
मंजिलें
मंजिलें
Mukesh Kumar Sonkar
आज का महाभारत 2
आज का महाभारत 2
Dr. Pradeep Kumar Sharma
माँ ही हैं संसार
माँ ही हैं संसार
Shyamsingh Lodhi Rajput (Tejpuriya)
ग़ज़ल/नज़्म - हुस्न से तू तकरार ना कर
ग़ज़ल/नज़्म - हुस्न से तू तकरार ना कर
अनिल कुमार
नन्हीं बाल-कविताएँ
नन्हीं बाल-कविताएँ
Kanchan Khanna
जिंदगी की खोज
जिंदगी की खोज
CA Amit Kumar
" टैगोर "
सुनीलानंद महंत
*बांहों की हिरासत का हकदार है समझा*
*बांहों की हिरासत का हकदार है समझा*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
மறுபிறவியின் உண்மை
மறுபிறவியின் உண்மை
Shyam Sundar Subramanian
व्यंग्य आपको सिखलाएगा
व्यंग्य आपको सिखलाएगा
Pt. Brajesh Kumar Nayak
छाई रे घटा घनघोर,सखी री पावस में चहुंओर
छाई रे घटा घनघोर,सखी री पावस में चहुंओर
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
"गूंगी ग़ज़ल" के
*प्रणय प्रभात*
अच्छा लगना
अच्छा लगना
Madhu Shah
सावन
सावन
Ambika Garg *लाड़ो*
आज बगिया में था सम्मेलन
आज बगिया में था सम्मेलन
VINOD CHAUHAN
मत पूछो मेरा कारोबार क्या है,
मत पूछो मेरा कारोबार क्या है,
Vishal babu (vishu)
"खूबसूरती"
Dr. Kishan tandon kranti
समाज मे अविवाहित स्त्रियों को शिक्षा की आवश्यकता है ना कि उप
समाज मे अविवाहित स्त्रियों को शिक्षा की आवश्यकता है ना कि उप
शेखर सिंह
हम दुनिया के सभी मच्छरों को तो नहीं मार सकते है तो क्यों न ह
हम दुनिया के सभी मच्छरों को तो नहीं मार सकते है तो क्यों न ह
Rj Anand Prajapati
पावस की ऐसी रैन सखी
पावस की ऐसी रैन सखी
लक्ष्मी सिंह
🙂
🙂
Sukoon
आत्म बोध
आत्म बोध
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Loading...