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22 Nov 2023 · 1 min read

*हर शाम निहारूँ मै*

हर शाम निहारूँ मै
****************

हर शाम निहारूँ मै,
दिन-रात पुकारूँ मै।

मँझदार फँसी किश्ती
उस पार उतारूँ मै।

हर हाल मुनासिब हो,
खुद रूप निखारूँ मै।

हो राय शुमारी सी,
पल भी न बिसारूँ मै।

वो नाम जुड़े मुझ से,
कर जोड़ गुहारूँ मै।

तू जान मुलायम सी,
आ प्यार दुलारूँ मैं।

हूँ लीन मै मनसीरत,
दुख दर्द निसारूँ मै।
****************
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेडी राओ वाली (कैथल)

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