Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Mar 2024 · 1 min read

हर राह सफर की।

कुछ पल आ करके यूं ही गुजर जातें हैं।
बन कर याद जो जिन्दगी भर रह जातें हैं।।1।।

कौन समझाए उन्हें जो हमे भूल गए हैं।
अपनी यादों से जो हमे रुला कर जातें हैं।।2।।

हर राह सफर की उनसे दूर ही जाती हैं।
आज हम खुदको ऐसे दो राहे पर पातें हैं।।3।।

ऐसे तो तन्हाई में जो हमे अपना कहते हैं।
अक्सर महफिल में वो गैरों से हो जातें हैं।।4।।

छोड़ो अबतो ताज तुम भी इश्क करना।
दिल के अरमां दिल में ही बिखर जातें हैं।।5।।

तुम्हारी किस्मत तुम हो आज बुलंदी पर।
हर ही फूल कहां दरगाहों पर चढ़ पातें हैं।।6।।

ताज मोहम्मद
लखनऊ

1 Like · 67 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Taj Mohammad
View all
You may also like:
" धरती का क्रोध "
Saransh Singh 'Priyam'
धूमिल होती यादों का, आज भी इक ठिकाना है।
धूमिल होती यादों का, आज भी इक ठिकाना है।
Manisha Manjari
परीक्षाएँ आ गईं........अब समय न बिगाड़ें
परीक्षाएँ आ गईं........अब समय न बिगाड़ें
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
"प्रेम के पानी बिन"
Dr. Kishan tandon kranti
!! पलकें भीगो रहा हूँ !!
!! पलकें भीगो रहा हूँ !!
Chunnu Lal Gupta
नृत्य किसी भी गीत और संस्कृति के बोल पर आधारित भावना से ओतप्
नृत्य किसी भी गीत और संस्कृति के बोल पर आधारित भावना से ओतप्
Rj Anand Prajapati
"" *माँ के चरणों में स्वर्ग* ""
सुनीलानंद महंत
मैं बंजारा बन जाऊं
मैं बंजारा बन जाऊं
Shyamsingh Lodhi Rajput (Tejpuriya)
मेरी प्यारी अभिसारी हिंदी......!
मेरी प्यारी अभिसारी हिंदी......!
Neelam Sharma
इश्क में हमको नहीं, वो रास आते हैं।
इश्क में हमको नहीं, वो रास आते हैं।
सत्य कुमार प्रेमी
जाना ही होगा 🙏🙏
जाना ही होगा 🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
आकाश के सितारों के साथ हैं
आकाश के सितारों के साथ हैं
Neeraj Agarwal
मुद्दत से संभाला था
मुद्दत से संभाला था
Surinder blackpen
जिसके मन तृष्णा रहे, उपजे दुख सन्ताप।
जिसके मन तृष्णा रहे, उपजे दुख सन्ताप।
अभिनव अदम्य
ये मानसिकता हा गलत आये के मोर ददा बबा मन‌ साग भाजी बेचत रहिन
ये मानसिकता हा गलत आये के मोर ददा बबा मन‌ साग भाजी बेचत रहिन
PK Pappu Patel
बात न बनती युद्ध से, होता बस संहार।
बात न बनती युद्ध से, होता बस संहार।
डॉ.सीमा अग्रवाल
😢धूर्तता😢
😢धूर्तता😢
*प्रणय प्रभात*
रमेशराज के 2 मुक्तक
रमेशराज के 2 मुक्तक
कवि रमेशराज
1-	“जब सांझ ढले तुम आती हो “
1- “जब सांझ ढले तुम आती हो “
Dilip Kumar
गांव
गांव
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
हम ख़फ़ा हो
हम ख़फ़ा हो
Dr fauzia Naseem shad
जब भी आया,बे- मौसम आया
जब भी आया,बे- मौसम आया
मनोज कुमार
चाँद पूछेगा तो  जवाब  क्या  देंगे ।
चाँद पूछेगा तो जवाब क्या देंगे ।
sushil sarna
तू है
तू है
Satish Srijan
फितरत
फितरत
Dr.Khedu Bharti
मन का कारागार
मन का कारागार
Pooja Singh
गिल्ट
गिल्ट
आकांक्षा राय
जी20
जी20
लक्ष्मी सिंह
याचना
याचना
Suryakant Dwivedi
यहाँ कुशलता रेंगती, वहाँ बताएँ मित्र (कुंडलिया)
यहाँ कुशलता रेंगती, वहाँ बताएँ मित्र (कुंडलिया)
Ravi Prakash
Loading...