Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Feb 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-251💐

हर बार बार-बार उन्हें सोचते रहे हम।
हर जग़ह बार-बार उन्हें खोजते रहे हम।।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
307 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"गंगा माँ बड़ी पावनी"
Ekta chitrangini
रंजीत कुमार शुक्ल
रंजीत कुमार शुक्ल
Ranjeet Kumar Shukla
गजल सगीर
गजल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
ये, जो बुरा वक्त आता है ना,
ये, जो बुरा वक्त आता है ना,
Sandeep Mishra
मै भी हूं तन्हा,तुम भी हो तन्हा
मै भी हूं तन्हा,तुम भी हो तन्हा
Ram Krishan Rastogi
कहते हो इश्क़ में कुछ पाया नहीं।
कहते हो इश्क़ में कुछ पाया नहीं।
Manoj Mahato
सूरज
सूरज
PRATIBHA ARYA (प्रतिभा आर्य )
क्या ढूढे मनुवा इस बहते नीर में
क्या ढूढे मनुवा इस बहते नीर में
rekha mohan
तुम्हें कब ग़ैर समझा है,
तुम्हें कब ग़ैर समझा है,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
जय जय जय जय बुद्ध महान ।
जय जय जय जय बुद्ध महान ।
Buddha Prakash
दोहा त्रयी. . . .
दोहा त्रयी. . . .
sushil sarna
बस एक गलती
बस एक गलती
Vishal babu (vishu)
■ आज का शेर....
■ आज का शेर....
*Author प्रणय प्रभात*
"Communication is everything. Always always tell people exac
पूर्वार्थ
आई होली
आई होली
Kavita Chouhan
💐प्रेम कौतुक-302💐
💐प्रेम कौतुक-302💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
फूल खुशबू देते है _
फूल खुशबू देते है _
Rajesh vyas
दुखता बहुत है, जब कोई छोड़ के जाता है
दुखता बहुत है, जब कोई छोड़ के जाता है
Kumar lalit
I thought you're twist to what I knew about people of modern
I thought you're twist to what I knew about people of modern
Sukoon
जब असहिष्णुता सर पे चोट करती है ,मंहगाईयाँ सर चढ़ के जब तांडव
जब असहिष्णुता सर पे चोट करती है ,मंहगाईयाँ सर चढ़ के जब तांडव
DrLakshman Jha Parimal
तुममें और मुझमें बस एक समानता है,
तुममें और मुझमें बस एक समानता है,
सिद्धार्थ गोरखपुरी
हसीनाओं से कभी भूलकर भी दिल मत लगाना
हसीनाओं से कभी भूलकर भी दिल मत लगाना
gurudeenverma198
*फितरत*
*फितरत*
Dushyant Kumar
बाल कविता: 2 चूहे मोटे मोटे (2 का पहाड़ा, शिक्षण गतिविधि)
बाल कविता: 2 चूहे मोटे मोटे (2 का पहाड़ा, शिक्षण गतिविधि)
Rajesh Kumar Arjun
*जो भी अच्छे काम करेगा, कलियुग में पछताएगा (हिंदी गजल)*
*जो भी अच्छे काम करेगा, कलियुग में पछताएगा (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
पेड़ नहीं, बुराइयां जलाएं
पेड़ नहीं, बुराइयां जलाएं
अरशद रसूल बदायूंनी
दूर क्षितिज के पार
दूर क्षितिज के पार
लक्ष्मी सिंह
अकेले हुए तो ये समझ आया
अकेले हुए तो ये समझ आया
Dheerja Sharma
मदद
मदद
Dr. Pradeep Kumar Sharma
बिना रुके रहो, चलते रहो,
बिना रुके रहो, चलते रहो,
Kanchan Alok Malu
Loading...