Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Feb 2024 · 1 min read

हर एक चोट को दिल में संभाल रखा है ।

हर एक चोट को दिल में संभाल रखा है ।
मैंने आंखों में कुछ ख्बाबों को पाल रखा है ।
रात भर सोचती हूं मैं नई उम्मीदों के साथ ।
मैंने कल को अपनी चाहत में ढाल रखा है ।
मंज़िले दूर है चलना बहुत मुश्किल है यहां।
हर राह का अपनी मैंने खुद ख्याल रखा है ।
जो अपने आप को उसूलों में ढाल लेते हैं ।
उन्हीं हाथों से मैंने दामन संभाल रखा है ।
मेरी आंखों के ख्वाब बिखर न जाये ज़माने में।
दुनिया में मैंने हर कदम का खुद ख्याल रखा है ।
हालाते जिंदगी अब मेरी तुम भी जान लो ए ,फूल,।
मजबूरी के किस्से से मैंने खुद को निकाल रखा है
Phool gufran

55 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वाराणसी की गलियां
वाराणसी की गलियां
PRATIK JANGID
*हनुमान जी*
*हनुमान जी*
Shashi kala vyas
अब भी दुनिया का सबसे कठिन विषय
अब भी दुनिया का सबसे कठिन विषय "प्रेम" ही है
DEVESH KUMAR PANDEY
*युद्ध का आधार होता है 【मुक्तक】*
*युद्ध का आधार होता है 【मुक्तक】*
Ravi Prakash
2554.पूर्णिका
2554.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
हॉस्पिटल मैनेजमेंट
हॉस्पिटल मैनेजमेंट
Dr. Pradeep Kumar Sharma
नववर्ष तुम्हे मंगलमय हो
नववर्ष तुम्हे मंगलमय हो
Ram Krishan Rastogi
संगति
संगति
Buddha Prakash
लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
Dr Tabassum Jahan
ये पैसा भी गजब है,
ये पैसा भी गजब है,
Umender kumar
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
जब-जब मेरी क़लम चलती है
जब-जब मेरी क़लम चलती है
Shekhar Chandra Mitra
वो निरंतर चलता रहता है,
वो निरंतर चलता रहता है,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
मन मस्तिष्क और तन को कुछ समय आराम देने के लिए उचित समय आ गया
मन मस्तिष्क और तन को कुछ समय आराम देने के लिए उचित समय आ गया
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"तुम्हारी हंसी" (Your Smile)
Sidhartha Mishra
प्रेम और आदर
प्रेम और आदर
ओंकार मिश्र
प्रश्न  शूल आहत करें,
प्रश्न शूल आहत करें,
sushil sarna
Indulge, Live and Love
Indulge, Live and Love
Dhriti Mishra
Ye sham adhuri lagti hai
Ye sham adhuri lagti hai
Sakshi Tripathi
विवशता
विवशता
आशा शैली
मेरे सजदे
मेरे सजदे
Dr fauzia Naseem shad
"फूल"
Dr. Kishan tandon kranti
याचना
याचना
Suryakant Dwivedi
तेरा मेरा रिस्ता बस इतना है की तुम l
तेरा मेरा रिस्ता बस इतना है की तुम l
Ranjeet kumar patre
बाजारवाद
बाजारवाद
Punam Pande
असोक विजयदसमी
असोक विजयदसमी
Mahender Singh
ईश्वर
ईश्वर
Shyam Sundar Subramanian
कोई पत्ता कब खुशी से अपनी पेड़ से अलग हुआ है
कोई पत्ता कब खुशी से अपनी पेड़ से अलग हुआ है
कवि दीपक बवेजा
A heart-broken Soul.
A heart-broken Soul.
Manisha Manjari
Loading...